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"हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
लेखक के अनुसार, जब मन में लिखने का आवेग या स्फूर्ति होती है, तो विषय (खूँटी) कोई भी हो, असली चीज़ लेखक के मन के भाव (हैट) होते हैं, जिन्हें वह किसी भी विषय पर व्यक्त कर सकता है।
"उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
मानटेन की पद्धति में लेखक जो कुछ स्वयं देखता, सुनता और अनुभव करता है, उसे सच्ची अनुभूति और स्वच्छंदता के साथ लिख देता है। इसी से प्रभावित होकर लेखक ने भी इसी पद्धति को अपनाने का निर्णय लिया।
“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद..." यह तुलना किस पर आधारित है?
सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव।
तरुणों (युवाओं) के पास भविष्य की अभिलाषाएँ और सपने होते हैं, जबकि वृद्धों के पास अपने बीते हुए कल (अतीत) के अनुभव होते हैं। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।
निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
अमीर खुसरो ने चार औरतों की अलग-अलग इच्छाओं (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) को एक ही पद्य में पिरो दिया था। इसी प्रतिभा (पद्धति) का उपयोग करके लेखक भी अपने दो अलग-अलग विषयों ('दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज सुधार') को एक ही निबंध में समाहित करना चाहता है।
निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
लेखक बताता है कि मानव इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न पड़ी हो। जो कल के सुधार थे, वे आज के दोष बन जाते हैं और उनमें फिर से 'नव सुधार' की आवश्यकता होती है, इसीलिए जीवन प्रगतिशील है।
निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
निबंध लेखन में देखने, सुनने और अनुभव करने की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि इससे निबंध में 'सच्ची अनुभूति' और 'सच्चे भावों की अभिव्यक्ति' आती है। जब लेखक स्वयं के अनुभव लिखता है, तो उसमें कृत्रिमता (बनावटीपन) नहीं होती, बल्कि उसका उल्लास झलकता है। इससे पाठक भी उस निबंध से भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है, जो केवल किताबी ज्ञान (गंभीर तर्कपूर्ण विवेचना) से संभव नहीं है।
पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए-
निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
'आम के आम गुठलियों के दाम' लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
जैविक खाद: आम के आम गुठलियों के दाम
आजकल रासायनिक खादों ने हमारी मिट्टी को जहरीला कर दिया है। इसका सबसे अच्छा विकल्प जैविक खाद (Organic Compost) है। हम अपने घरों से निकलने वाले गीले कचरे—सब्जियों के छिलके, फलों के अवशेष (जैसे आम की गुठलियाँ), और चायपत्ती—को कूड़े में फेंकने के बजाय एक गड्ढे या डब्बे में जमा कर सकते हैं। कुछ ही हफ्तों में यह कचरा सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाता है। इससे एक ओर जहाँ हमारे घर का कचरा साफ (प्रबंधित) हो जाता है, वहीं दूसरी ओर हमारी बालकनी या खेत के पौधों को मुफ्त में उत्तम पोषण मिल जाता है। इसे ही कहते हैं—आम के आम और गुठलियों के दाम!
"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"
अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
डायरी लेखन:
दिनांक: २३ नवंबर
आज मुझे 'दूर के ढोल सुहावने' वाली कहावत का असली मतलब समझ आया। मुझे हमेशा लगता था कि मेरे दूर के रिश्तेदार जो महानगर (मुंबई) में रहते हैं, उनका जीवन कितना चकाचौंध और मजे से भरा होगा। आज मैं उनके घर रहने आया हूँ। यहाँ का जीवन बहुत मशीन की तरह है। सुबह से लेकर रात तक बस लोकल ट्रेन की भागदौड़, प्रदूषण, और समय की भारी कमी। पास बैठकर देखा तो समझ आया कि जिस ढोल (महानगर) की आवाज़ मुझे गाँव से मधुर लगती थी, वह असल में कितना कर्कश और थका देने वाला है। सच में, दूर से चीजें जैसी दिखती हैं, पास से वैसी नहीं होतीं!
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए।
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास (संबंध तत्पुरुष) |
| विचार-समूह | विचारों का समूह | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| जीवन-संग्राम | जीवन रूपी संग्राम | कर्मधारय समास |
| नव-वधू | नई है जो वधू | कर्मधारय समास |
| छोटे-छोटे | छोटे और छोटे (पुनरुक्त) | अव्ययीभाव समास |
नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-
नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। (सुधार, सुंदर, गति, समाज)
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। (जैसे विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक)। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
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