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'आम के आम गुठलियों के दाम' लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
जैविक खाद: आम के आम गुठलियों के दाम
आजकल रासायनिक खादों ने हमारी मिट्टी को जहरीला कर दिया है। इसका सबसे अच्छा विकल्प जैविक खाद (Organic Compost) है। हम अपने घरों से निकलने वाले गीले कचरे—सब्जियों के छिलके, फलों के अवशेष (जैसे आम की गुठलियाँ), और चायपत्ती—को कूड़े में फेंकने के बजाय एक गड्ढे या डब्बे में जमा कर सकते हैं। कुछ ही हफ्तों में यह कचरा सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाता है। इससे एक ओर जहाँ हमारे घर का कचरा साफ (प्रबंधित) हो जाता है, वहीं दूसरी ओर हमारी बालकनी या खेत के पौधों को मुफ्त में उत्तम पोषण मिल जाता है। इसे ही कहते हैं—आम के आम और गुठलियों के दाम!
"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"
अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
डायरी लेखन:
दिनांक: २३ नवंबर
आज मुझे 'दूर के ढोल सुहावने' वाली कहावत का असली मतलब समझ आया। मुझे हमेशा लगता था कि मेरे दूर के रिश्तेदार जो महानगर (मुंबई) में रहते हैं, उनका जीवन कितना चकाचौंध और मजे से भरा होगा। आज मैं उनके घर रहने आया हूँ। यहाँ का जीवन बहुत मशीन की तरह है। सुबह से लेकर रात तक बस लोकल ट्रेन की भागदौड़, प्रदूषण, और समय की भारी कमी। पास बैठकर देखा तो समझ आया कि जिस ढोल (महानगर) की आवाज़ मुझे गाँव से मधुर लगती थी, वह असल में कितना कर्कश और थका देने वाला है। सच में, दूर से चीजें जैसी दिखती हैं, पास से वैसी नहीं होतीं!
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