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🪶 पाठ 7: मैं और मेरा देश

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

"एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई", इस पंक्ति में रेखांकित शब्द 'दरार' किस ओर संकेत करता है?

  1. (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
  2. (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
  3. (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
  4. (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

सही उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।

लेखक को लगता था कि वह अपने घर, पड़ोस और नगर के साथ मिलकर पूरी तरह से 'पूर्ण' (complete) हो गया है। लेकिन लाला लाजपत राय का अनुभव सुनकर उसे यह एहसास हुआ कि देश के गुलाम या हीन होने पर यह सारी व्यक्तिगत पूर्णता अर्थहीन है। इस अनुभूति ने उसके पूर्णता के भाव पर करारी चोट (प्रहार) की, जिसे उसने आनंद की दीवार में 'दरार' पड़ना कहा है।

Q2

निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

  1. (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
  2. (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
  3. (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
  4. (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

सही उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।

लेखक स्पष्ट करता है कि यह प्रश्न बात को "खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और ठीक समय पर पूछा गया है।" अतः ऐसे प्रश्न जो बातचीत या विचारों को गहराई और विस्तार देते हैं, उनका उत्तर देने में आनंद आता है।

Q3

"अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए", इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में-

  1. (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
  2. (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
  3. (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
  4. (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

सही उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

पराधीनता (गुलामी) के दिनों को 'दीन' (दयनीय) इसलिए कहा गया है क्योंकि उस समय देशवासियों का कोई सम्मान नहीं था, वे विदेशियों के अधीन थे और उनके आत्मसम्मान को कुचला जाता था।

Q4

निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि-

  1. (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
  2. (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
  3. (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
  4. (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

सही उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

लाला लाजपत राय के अनुभव के आधार पर लेखक बताता है कि यदि मनुष्य के पास स्वर्ग के भी सभी साधन हों, लेकिन उसका देश गुलाम हो (पराधीन हो), तो वे सारे साधन उसे गौरव और सम्मान नहीं दे सकते।

Q5

"पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है", इस वाक्य में रेखांकित शब्द 'गाँठ' किन दो बातों को साथ बाँधती है?

  1. (क) देश और नागरिक
  2. (ख) देश और संविधान
  3. (ग) देश और विदेश
  4. (घ) व्यवसाय और आजीविका

सही उत्तर: (क) देश और नागरिक।

निबंध में जापान की दोनों घटनाओं (फल देने वाला युवक और चित्र चुराने वाला विद्यार्थी) के माध्यम से यह 'गाँठ' या संबंध स्थापित किया गया है कि देश और नागरिक एक-दूसरे से अभिन्न रूप से बँधे हुए हैं। नागरिक के अच्छे-बुरे कार्यों का सीधा असर देश के गौरव या अपमान पर पड़ता है।

Q6

प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

  1. (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
  2. (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
  3. (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
  4. (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

सही उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।

पूरे निबंध का मूल विचार यही है कि "मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।" व्यक्ति की पहचान और सम्मान उसके देश से ही जुड़ा होता है, यही इस निबंध का मुख्य भाव है।

Q1

स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

स्वामी रामतीर्थ उस जापानी युवक की असीम देशभक्ति और अपने राष्ट्र के सम्मान के प्रति उसकी संवेदनशीलता देखकर मुग्ध हो गए थे। उस युवक ने अपनी पत्नी को रेल में बैठाने का काम बीच में छोड़कर दौड़कर फल खरीदे, ताकि एक विदेशी के मन में उसके देश (जापान) के बारे में यह गलत धारणा न बने कि "जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।" युवक का यह कृत्य उसके गहरे राष्ट्रप्रेम का परिचायक था।

Q2

जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

  • मूल्य के रूप में क्या माँगा: जापानी युवक ने फलों के दाम लेने से इनकार कर दिया और आग्रह करने पर कहा कि "आप इनका मूल्य देना ही चाहते हैं तो वह यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।"
  • व्यक्तित्व की छवि: इससे मेरे मन में उस युवक की एक ऐसे जागरूक, निस्वार्थ और सजग नागरिक की छवि उभरती है जिसके लिए धन-दौलत से कहीं बढ़कर अपने देश की प्रतिष्ठा और सम्मान है। वह अपने देश के माथे पर कोई कलंक नहीं लगने देना चाहता।
Q3

"बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।" स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

  • तर्क: व्यक्ति और देश का संबंध अविभाज्य है। किसी भी नागरिक की हीनता या महानता का फल केवल उसे ही नहीं, बल्कि उसके पूरे देश को भुगतना पड़ता है। इसी तरह, देश के अपमान या गौरव का सीधा प्रभाव उस नागरिक के व्यक्तिगत जीवन और सम्मान पर भी पड़ता है।
  • उदाहरण: जब जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को फल दिए, तो इससे पूरी दुनिया में जापान का गौरव बढ़ा। वहीं, जब एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान की लाइब्रेरी से दुर्लभ चित्र चुराए, तो उसे तो निकाला ही गया, साथ ही पुस्तकालय के बाहर लिख दिया गया कि उस विद्यार्थी के देश का कोई भी नागरिक अब यहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। उस एक व्यक्ति की चोरी से उसके पूरे देश के मस्तक पर कलंक लग गया।
Q1

"देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है", अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

भाव: यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि नागरिक और देश की छवि एक-दूसरे का प्रतिबिंब (Reflection) होती है।

  • गौरव का उदाहरण: जब नीरज चोपड़ा या इसरो के वैज्ञानिक ओलंपिक या अंतरिक्ष मिशन में सफलता प्राप्त करते हैं, तो वे केवल अपना सम्मान नहीं बढ़ाते, बल्कि पूरी दुनिया में भारत का मस्तक गर्व से ऊँचा कर देते हैं।
  • हीनता का उदाहरण: जब कोई नागरिक विदेशों में जाकर कोई अपराध करता है या अंतरराष्ट्रीय खेल में डोपिंग (नशे) का दोषी पाया जाता है, तो केवल उसकी बदनामी नहीं होती, बल्कि विदेशी मीडिया पूरे भारत की छवि को हीन दृष्टि से देखने लगता है। अतः नागरिक के कर्म ही देश का भाग्य तय करते हैं।
Q2

"मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।"
(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं?
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द 'बहुतों' में कौन-कौन सम्मिलित होंगे?
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी...

  • (क) मेरा अनुभव: मैं सुबह उठकर नाश्ते के लिए माता-पिता पर, ज्ञान के लिए शिक्षकों पर, स्कूल जाने के लिए बस ड्राइवर पर निर्भर हूँ। बदले में, मैं अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाने में, माता-पिता के घरेलू कार्यों में और सहपाठियों की पढ़ाई में उनकी मदद करके सहयोग देता हूँ।
  • (ख) 'बहुतों' में कौन सम्मिलित होंगे: इसमें परिवार के सदस्य, पड़ोसी, समाज के विभिन्न पेशों से जुड़े लोग (किसान, शिक्षक, डॉक्टर, सफाईकर्मी, व्यापारी) और अंततः पूरा राष्ट्र सम्मिलित है।
  • (ग) रचनाकार का सहयोग: एक लेखक के रूप में रचनाकार को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए किसानों, बुनकरों और समाज की सेवाओं की आवश्यकता पड़ती होगी। बदले में, वह समाज को अपने विचारों, ज्ञान और साहित्य के माध्यम से जागरूक और प्रेरित करने का सहयोग देता होगा।
Q3

"सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।"
(क) देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं?
(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है?

  • (क) हमारे दायित्व: जिस प्रकार युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाता, उसी प्रकार देश की प्रगति में हर व्यक्ति का योगदान होता है। एक किसान का अनाज उगाना, एक शिक्षक का ज्ञान देना, एक सफाईकर्मी का स्वच्छता रखना, और एक आम नागरिक का वोट सही व्यक्ति को देना—यह सभी देश के विकास और सुरक्षा के महत्वपूर्ण मोर्चे हैं।
  • (ग) जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है: जीवन में हर पल कठिनाइयों, असफलताओं और नकारात्मक शक्तियों से संघर्ष करना पड़ता है। मनुष्य को अपनी आजीविका कमाने, समाज में सम्मान पाने और अपने देश की गरिमा को बनाए रखने के लिए निरंतर सचेत और संघर्षरत रहना पड़ता है, इसीलिए जीवन को एक बहुमुखी युद्ध कहा गया है।
Q4

"अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।"
(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?
(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं?

  • (क) पारस्परिक संबंध: पहले के समय में पड़ोसियों के बीच एक बड़े संयुक्त परिवार जैसा संबंध होता था। लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते थे, बच्चों को पूरे मोहल्ले का प्यार और संरक्षण मिलता था, और समाज में गहरी आत्मीयता व संगठन था।
  • (ख) वर्तमान परिवर्तन और कारण: आज के समय में पड़ोसियों के बीच आत्मीयता कम हो गई है। लोग अक्सर अपने पड़ोसियों का नाम तक नहीं जानते। इसके कारण हैं—तेजी से बढ़ता शहरीकरण, एकल परिवारों (Nuclear families) का चलन, व्यस्त दिनचर्या, और मोबाइल व इंटरनेट के कारण भौतिक दुनिया से कटकर आभासी (Virtual) दुनिया में सिमट जाना।
Q5

"क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?" अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?

सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक स्थानों के सौंदर्य को बनाए रखने के लिए हम निम्नलिखित कार्य करते हैं:

  • सड़कों, पार्कों और ऐतिहासिक स्मारकों पर कभी कूड़ा या प्लास्टिक नहीं फेंकते, हमेशा कूड़ेदान का ही उपयोग करते हैं।
  • सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर कभी नाम लिखकर या पान/गुटखा थूककर उन्हें गंदा नहीं करते।
  • भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर अनुशासन बनाए रखते हैं और ठेलमठेल नहीं करते।
  • समय-समय पर विद्यालय और मोहल्ले में 'स्वच्छता अभियान' चलाकर लोगों को जागरूक करते हैं।
Q6

"मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।" देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें?

क्या करें (कर्तव्य)क्या नहीं करें (निषेध)
हर छोटा-बड़ा कार्य पूरी निष्ठा और अच्छी भावना के साथ करें।सार्वजनिक स्थानों (बस, रेल, क्लब) में देश की बुराई या नकारात्मक चर्चा न करें।
चुनाव में जाति या लालच से ऊपर उठकर सबसे योग्य और ईमानदार व्यक्ति को ही अपना मत (Vote) दें।सड़कों पर कूड़ा न फेंकें और दीवारों पर गंदगी या पीक न थूकें।
अपने देश की विशेषताओं पर गर्व करें और सामूहिक आत्मविश्वास (शक्ति-बोध) को बढ़ाएँ।गलत लोगों के उत्तेजक नारों या प्रभाव में आकर कभी गलत निर्णय न लें।
Q1

“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है"
(क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
अब इस निबंध के आलोक में दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए।

  • (क): रचनाकार को ऐसे वैचारिक प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो बात को गहराई देते हैं, उसे आगे बढ़ने का अवसर देते हैं, और जो बिल्कुल ठीक समय (प्रासंगिक संदर्भ) पर पूछे गए हों।
  • (ख): मुझे ऐसे विश्लेषणात्मक और तार्किक प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है जो सीधा 'हाँ' या 'ना' में उत्तर न देकर, सोचने पर मजबूर करें और समाज या जीवन से जुड़े हों।
  • निर्मित तीन प्रश्न (सामग्री के आधार पर):
    1. क्या केवल धनी और संपन्न व्यक्ति ही देश के विकास में योगदान दे सकते हैं?
    2. एक साधारण नागरिक देश की सुरक्षा और ऐश्वर्य में अपनी भूमिका कैसे निभा सकता है?
    3. हमारे गलत कार्यों का हमारे देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Q1

निबंध की कुछ विशेषताओं (विषय-केंद्रीयता, वैयक्तिकता, विचार प्रधानता, सजीवता, संक्षिप्तता, तार्किकता, प्रेरणात्मकता) से संबंधित संदर्भ 'मैं और मेरा देश' निबंध से खोजकर लिखिए।

  • विषय-केंद्रीयता: पूरा निबंध एक ही मूल विषय—व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध—के इर्द-गिर्द घूमता है।
  • वैयक्तिकता (मैं शैली): "मैं अपने घर में जनमा था, पला था।" लेखक ने इसे अपने व्यक्तिगत अनुभवों (प्रथम पुरुष) के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
  • तार्किकता व विचार प्रधानता: लेखक तर्कों के साथ सिद्ध करता है कि चुनाव (मतदान) ही देश की उच्चता और हीनता की सबसे बड़ी कसौटी है।
  • सजीवता / चित्रात्मकता: कमालपाशा द्वारा बूढ़े किसान के लाए हुए शहद को अपनी उँगली से चाटने का दृश्य अत्यंत सजीव है।
  • प्रेरणात्मकता: स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की कहानी पाठकों में देशभक्ति की गहरी प्रेरणा जगाती है।
Q2

यह पूरा निबंध प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली में लिखा गया है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।

इस निबंध की अन्य प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • दृष्टांत शैली (उदाहरणों का प्रयोग): लेखक ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए इतिहास और वास्तविक जीवन की कहानियों (जैसे- जापान के दो छात्रों की कहानी, कमालपाशा का प्रसंग, शल्य और कर्ण का प्रसंग) का सुंदर प्रयोग किया है।
  • संवादात्मकता (पाठक से सीधा जुड़ाव): "सुना नहीं आपने", "वाह, क्या सवाल पूछा है आपने"—ऐसी पंक्तियों से लगता है कि लेखक सीधे पाठक से बात कर रहा है।
  • विश्लेषणात्मकता: देश की कमजोरियों को 'शक्ति-बोध' और 'सौंदर्य-बोध' जैसे दो स्पष्ट भागों में बाँटकर उनका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।
Q1

जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
2. "जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें", आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

  • (1) चुनावी गतिविधियाँ: क्षेत्र में रैलियाँ निकाली जाती हैं, लाउडस्पीकर पर प्रचार होता है, दीवारों पर पोस्टर और बैनर लग जाते हैं, और प्रत्याशी घर-घर जाकर वोट माँगते हैं। चारों ओर एक राजनीतिक गहमागहमी का माहौल बन जाता है।
  • (2) अच्छे उम्मीदवार के गुण: एक अच्छा उम्मीदवार वह है जो ईमानदार हो, शिक्षित हो, आपराधिक पृष्ठभूमि का न हो, समाज सेवा की भावना रखता हो, और जो झूठे वादे करने के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं (शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार) को सुलझाने की क्षमता रखता हो।
Q1

"ठीक मनुष्य को अपना मत दें।" आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।

विज्ञापन का प्रारूप:

जागरूक मतदाता, सशक्त लोकतंत्र!

क्या आप अपने शहर का विकास चाहते हैं?

तो याद रखें—आपका वोट बिकने के लिए नहीं है!

  • जाति-धर्म नहीं, काम देखें।
  • उम्मीदवार की ईमानदारी और शिक्षा परखें।
  • झूठे वादों और मुफ्त के लालच में न फँसें।

"वोट देना आपका अधिकार है, और सही व्यक्ति को चुनना आपका कर्तव्य!"

(चुनाव आयोग द्वारा जनहित में जारी)

Q1

अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों (जैसे 'दरार', 'गाँठ', 'पानी')।

अन्य अनेकार्थी/संदर्भित शब्द:

  • दीपक:
    - (भौतिक अर्थ): कमरे में अँधेरा था, उसने दीपक जला दिया।
    - (सम्मान/गौरव का अर्थ): स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए।
  • कसौटी:
    - (सोना परखने का पत्थर): सुनार ने सोने को कसौटी पर परखा।
    - (मूल्यांकन का आधार): चुनाव ही देश की उच्चता और हीनता की असली कसौटी है।
  • धक्का:
    - (शारीरिक धक्का): बस में भीड़ के कारण मुझे ज़ोर से धक्का लगा।
    - (आघात/नुकसान): मैं ऐसा कोई काम न करूँ जिससे मेरे देश के सम्मान को धक्का पहुँचे।
Q2

आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।

निबंध से चुने गए शब्द-युग्म:

  • मिलते-जुलते अर्थ वाले: ममता-दुलार, लाभ-सम्मान, होटलों-धर्मशालाओं, छोटी-छोटी, ठेलमठेल।
  • पुनरुक्त (एक ही शब्द की आवृत्ति): घूम-फिरकर, बड़ी-बड़ी, खील-खील, पास-पड़ोस, चुपके-चुपके।
Q3

नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए- अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णताअपूर्णता
अलौकिकअलोकइक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक- (कोई नहीं)
अपमानितअप्मानइत
अभिमानीअभिमानई