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🪶 पाठ 7: मैं और मेरा देश • मेरी समझ मेरे विचार

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Q1

स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

स्वामी रामतीर्थ उस जापानी युवक की असीम देशभक्ति और अपने राष्ट्र के सम्मान के प्रति उसकी संवेदनशीलता देखकर मुग्ध हो गए थे। उस युवक ने अपनी पत्नी को रेल में बैठाने का काम बीच में छोड़कर दौड़कर फल खरीदे, ताकि एक विदेशी के मन में उसके देश (जापान) के बारे में यह गलत धारणा न बने कि "जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।" युवक का यह कृत्य उसके गहरे राष्ट्रप्रेम का परिचायक था।

Q2

जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

  • मूल्य के रूप में क्या माँगा: जापानी युवक ने फलों के दाम लेने से इनकार कर दिया और आग्रह करने पर कहा कि "आप इनका मूल्य देना ही चाहते हैं तो वह यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।"
  • व्यक्तित्व की छवि: इससे मेरे मन में उस युवक की एक ऐसे जागरूक, निस्वार्थ और सजग नागरिक की छवि उभरती है जिसके लिए धन-दौलत से कहीं बढ़कर अपने देश की प्रतिष्ठा और सम्मान है। वह अपने देश के माथे पर कोई कलंक नहीं लगने देना चाहता।
Q3

"बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।" स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

  • तर्क: व्यक्ति और देश का संबंध अविभाज्य है। किसी भी नागरिक की हीनता या महानता का फल केवल उसे ही नहीं, बल्कि उसके पूरे देश को भुगतना पड़ता है। इसी तरह, देश के अपमान या गौरव का सीधा प्रभाव उस नागरिक के व्यक्तिगत जीवन और सम्मान पर भी पड़ता है।
  • उदाहरण: जब जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को फल दिए, तो इससे पूरी दुनिया में जापान का गौरव बढ़ा। वहीं, जब एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान की लाइब्रेरी से दुर्लभ चित्र चुराए, तो उसे तो निकाला ही गया, साथ ही पुस्तकालय के बाहर लिख दिया गया कि उस विद्यार्थी के देश का कोई भी नागरिक अब यहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। उस एक व्यक्ति की चोरी से उसके पूरे देश के मस्तक पर कलंक लग गया।