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🏠 पाठ 12: घर की याद • विधा से संवाद

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Q1

"गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर"

कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे जीवंत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं। ऐसी कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता से ऐसी विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए। (विशेषताएँ: स्मृति और दृश्य बिंब, लोकभाषा की सहजता, पंक्तियों का दोहराव, आलंकारिक प्रयोग, प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन, संबोधनात्मकता)

  • स्मृति और दृश्य बिंब: "घर नज़र में तिर रहा है, घर चतुर्दिक् घिर रहा है"।
  • लोकभाषा की सहजता: "और भौजी और सरला", "मन कि बड़ का झाड़ जैसे"।
  • पंक्तियों का दोहराव: "बहुत पानी गिर रहा है, और पानी गिर रहा है"।
  • आलंकारिक प्रयोग: "वज्र-भुज नवनीत-सा उर" (उपमा अलंकार)।
  • प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन: "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन"।
  • संबोधनात्मकता: "तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें"।
Q2

'घर की याद' कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें। (संकेत- पानी का गिरना, सबेरा होना)

कविता भावों की एक क्रमिक यात्रा है जिसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:

  1. प्रकृति का उद्दीपन: रात-भर पानी गिरने से कवि के भीतर घर की यादों का घिरना (स्मृतियों का आरंभ)।
  2. परिजनों का स्मरण: भाइयों-बहनों के प्यार और माँ के असीम स्नेह व उसकी अनपढ़ता का बोध।
  3. पिता का स्मरण: पिता की वीरता, उनकी भावुकता और पाँचवें बेटे को याद कर उनका रो पड़ना।
  4. सावन को दूत बनाना (संबोधन): अपनी व्यथा को छिपाते हुए सावन के माध्यम से घर पर अपनी 'मस्त' स्थिति का झूठा लेकिन सांत्वनापूर्ण संदेश भेजना।