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🏠 पाठ 12: घर की याद • व्याकरण की बात

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

कविता में स्थानीय भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उनमें रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।

  • एक छिन सौ बरस है रे
  • तुझे बतलाता कि बेला/ने फलानी फूल झेला
  • और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला
  • मन कि बड़ का झाड़ जैसे
  • छिन (क्षण/पल): मेरे लिए अपनी जन्मभूमि से दूर एक-एक छिन बिताना पहाड़ जैसा हो गया है।
  • फलानी (अमुक/कोई विशेष): पंचायत के फैसले में कहा गया कि फलानी जमीन पर अब गाँव के स्कूल का निर्माण होगा।
  • भौजी (भाभी): त्यौहार के दिन भौजी ने पूरे परिवार के लिए तरह-तरह के पकवान बनाए।
  • बड़ (बरगद): गाँव की चौपाल उसी पुराने बड़ के पेड़ के नीचे लगती है।
Q2

नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।

  • (ख) "पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा"
  • (ग) "खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह"
  • (घ) "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए"
  • (ङ) "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन"
  • (ख): 'बुढ़ापा' - भाववाचक संज्ञा, 'व्यापा' - क्रिया, 'जिनको' - सर्वनाम।
  • (ग): 'खुले' - विशेषण, 'वह' - सर्वनाम (पुरुषवाचक), 'बदन' - संज्ञा, 'फिरता' - क्रिया।
  • (घ): 'एक' - विशेषण (संख्यावाचक), 'फूट जाए' - क्रिया, 'पत्ता' - संज्ञा (जातिवाचक)।
  • (ङ): 'सजीले' - विशेषण (गुणवाचक), 'मेरे' - सर्वनाम, 'सावन' - संज्ञा (व्यक्तिवाचक/भाव)।