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कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
सही उत्तर: (ख) ममता और स्नेह।
कहानी में ताई अपना सारा वात्सल्य और ममता मिट्ठू (तोते) पर लुटाती हैं। वे अपने खाने की परवाह किए बिना मिट्ठू के लिए रोटी बचाती हैं, उसे नहलाती-धुलाती हैं और उसके साथ घंटों बातें (स्नेहपूर्ण संवाद) करती हैं।
जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
सही उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता।
जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति थे। किसी जीव (तोते) को पिंजरे में बंद देखकर उन्हें बेचैनी और आत्मग्लानि होती थी। इसी करुणा और नैतिक जिम्मेदारी (पाप का प्रायश्चित करने) के कारण उन्होंने मिट्ठू को खुली हवा में आने का मौका दिया।
मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
सही उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह।
मिट्ठू पिंजरे में रहने का आदी हो चुका था, लेकिन जब उसकी नज़र रोशनदान के बाहर की असीम दुनिया पर पड़ी, तो उसकी सहज 'स्वतंत्रता की चाह' जाग उठी और वह पिंजरे व कमरे की कैद को छोड़कर उड़ गया।
ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
सही उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव।
ताई के जीवन में कभी भरा-पूरा परिवार था, लेकिन बेटे-बहुओं के शहर चले जाने और बेटियों के अपनी गृहस्थी में रम जाने के कारण वे उस बड़े से घर में बिल्कुल अकेली रह गईं। यह अकेलापन और किसी से बात न हो पाना (संवादहीनता) ही उनके गहरे दुख का मुख्य कारण था।
कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
सही उत्तर: (ग) अकेलापन।
कहानी आज के समाज (विशेषकर ग्रामीण और मध्यवर्गीय समाज) में फैल रही उस विसंगति को उजागर करती है जहाँ युवा पीढ़ी रोजगार या सुख-सुविधाओं के लिए शहरों की ओर पलायन कर जाती है, और पीछे छूट गए वृद्ध माता-पिता को सूने घरों में 'अकेलेपन' का संताप झेलना पड़ता है।
"भगवान ! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
यहाँ 'नैया' का अर्थ 'शेष जीवन की यात्रा' या 'वृद्धावस्था' से है। ताई का भरा-पूरा परिवार बिखर चुका था। बेटे शहर चले गए और बेटियाँ ससुराल। उस बड़े से सूने घर में उन्हें अपना अकेलापन काटने को दौड़ता था। भविष्य की इसी चिंता और एकाकीपन से घबराकर वे गहरी साँस लेते हुए कहती हैं कि भगवान के सहारे बिना जीवन की यह कठिन नैया कैसे पार लगेगी।
"धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
यह वाक्य ताई के उस दुर्भाग्यपूर्ण अतीत की ओर संकेत करता है जब उनका भरा-पूरा परिवार बिखर गया। बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहर बस गए और जब कारबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा, तो मजबूरी में उनकी सारी खेती-बाड़ी, गाय-ढोर और संपत्ति धीरे-धीरे बिक गई या दूसरों (पराए हाथों) के अधिकार में चली गई।
"ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" क्यों?
ताई घर में बिल्कुल अकेली थीं और उनका मातृ-हृदय किसी को प्यार करने के लिए तरस रहा था। जब गनपत उनके सूनेपन को दूर करने के लिए एक प्यारा-सा तोता (मिट्ठू) ले आया, तो ताई को उसमें अपने खोए हुए परिवार और बच्चों की छवि दिखाई दी। मिट्ठू उनके बात करने का एकमात्र साधन (सहारा) बन गया, इसीलिए उनकी सारी रुकी हुई ममता उस पर बरस पड़ी।
"अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
"जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
कहानी का शीर्षक ताई और नए तोते (एवजी मिट्ठू) दोनों के लिए सार्थक प्रतीत होता है, लेकिन सबसे अधिक यह ताई की विडंबनापूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
नीचे कुछ उत्तर दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त है?
"गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
मेरे विचार: ताई को भ्रम में रखना तात्कालिक रूप से एक अच्छा विचार लग सकता है, लेकिन नैतिक और व्यावहारिक दृष्टि से यह उचित नहीं था।
संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए (चित्रात्मकता, संवादात्मकता, पुनरुक्ति, अतिशयोक्ति, लोकधर्मी भाषा, प्रश्नोत्तर शैली)।
| विशेष बिंदु | कहानी से अन्य उदाहरण |
|---|---|
| चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) | "ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास पसीना-पसीना होते रहे।" |
| संवादात्मकता | "जीते रहो बेटा, जुग जुग जिओ" और मिट्ठू का जवाब "खुश रहो! खुश रहो!!" |
| पुनरुक्ति | "हर हर गंगे ! हर हर गंगे !!" या "मर जा! मर जा!!" |
| अतिशयोक्ति | "उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" |
| लोकधर्मी भाषा | "अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं" |
| प्रश्नोत्तर शैली | "भगवान ! कैसे नैया पार लगेगी?" |
आपके अनुसार 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
“अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।" कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं 'मास्टराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
भारतीय ग्रामीण और पारंपरिक समाज में महिलाओं को अक्सर उनके पति के नाम या पेशे से पहचाना जाता है (जैसे मास्टर की पत्नी मास्टराइन, डॉक्टर की पत्नी डॉक्टरनी)। लेखक ने कहानी में 'मास्टराइन' या 'जगन मास्टर की घरवाली' शब्द का प्रयोग करके उस तत्कालीन ग्रामीण समाज की पितृसत्तात्मक यथार्थता और लोक-परिवेश को प्रामाणिकता (Authenticity) के साथ चित्रित करने का प्रयास किया है, जहाँ स्त्री की अपनी स्वतंत्र पहचान गौण हो जाती है।
"वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की" ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू 'राम राम सीताराम' कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।
आगे की कहानी:
एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। ताई उदास बैठी 'एवजी' (नकली) तोते को देख रही थीं जो अभी भी चुप था। अचानक रोशनदान से फड़फड़ाहट की आवाज़ आई और असली मिट्ठू उड़कर सीधा ताई के कंधे पर जा बैठा। ताई की आँखों से आँसू छलक पड़े। मिट्ठू ने पिंजरे में बैठे नए तोते को घूरकर देखा और अपनी गर्दन टेढ़ी करते हुए ज़ोर से बोला, "सीताराम! सीताराम! बाहर आ! बाहर आ!!" नया तोता डरकर पिंजरे के कोने में दुबक गया। ताई ने हँसते हुए नए तोते का पिंजरा खोल दिया। दोनों तोते अब पिंजरे के बाहर आँगन में उड़ रहे थे, और ताई का खंडहर-सा घर एक बार फिर 'राम-राम' की गूँज से आबाद हो गया था।
"मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए ! वो गए!!" मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
विज्ञापन का प्रारूप:
नाम: मिट्ठू (एक पहाड़ी तोता)
पहचान: बहुत बातूनी है। स्पष्ट आवाज़ में 'राम-राम', 'सीताराम' और 'हर-हर गंगे' बोलता है।
घटना: रोशनदान के रास्ते उड़कर अमराइयों में चला गया है। यह हमारी एक आदरणीय बुज़ुर्ग (ताई) की जान है।
इनाम: ₹500 नकद
जिस किसी सज्जन को यह तोता मिले, कृपया तुरंत संपर्क करें:
संपर्क: जगन मास्टर का घर, गाँव का मुख्य मार्ग।
(कृपया किसी भी हरे तोते को पकड़कर न लाएँ, तोते का 'राम-राम' बोलना अनिवार्य है!)
'मिट्ठू' शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता। इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- 'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना' जिसका अर्थ है 'अपनी प्रशंसा आप करना'। आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो।
जीव-जंतुओं से जुड़े अन्य मुहावरे:
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि 'फड़फड़ाफट' कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-
वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | कभी भी, बिना समय देखे (असमय) | संकट के समय एक सच्चा मित्र वक्त-बेवक्त काम आता है। |
| नियम-सिद्धांत | कायदे-कानून और उसूल | जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांत के पक्के आदमी थे। |
| शादी-ब्याह | विवाह और उससे जुड़े समारोह | सर्दियों के मौसम में गाँव में शादी-ब्याह की रौनक बढ़ जाती है। |
| तीज-त्योहार | पर्व और उत्सव | भारतीय संस्कृति में हर मौसम के लिए अलग तीज-त्योहार होते हैं। |
"ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।"
उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए- (तंग का विपरीतार्थक, मुहावरा, क्रिया, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, कारक, कर्ता)
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