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🦜 पाठ 3: संवादहीन • मेरे अनुभव मेरे विचार

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Q1

"गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

मेरे विचार: ताई को भ्रम में रखना तात्कालिक रूप से एक अच्छा विचार लग सकता है, लेकिन नैतिक और व्यावहारिक दृष्टि से यह उचित नहीं था।

  • तर्क: झूठ की बुनियाद ज्यादा दिन तक नहीं टिकती। गनपत और गाँव वालों ने ताई को सदमे से बचाने के लिए नया तोता रख तो दिया, लेकिन वे यह भूल गए कि ताई को केवल एक 'तोते की शक्ल' से प्यार नहीं था, बल्कि उस मिट्ठू की आवाज़ और उसकी हरकतों (संवाद) से प्यार था।
  • जब ताई ने नए तोते को बिल्कुल चुप (संवादहीन) देखा, तो उन्हें सच्चाई का पता चल ही गया होगा। ऐसे में, अचानक धोखा मिलने का आघात शायद सच जानने के आघात से भी अधिक गहरा हो सकता है।