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🦜 पाठ 3: संवादहीन • मेरी समझ मेरे विचार

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

"भगवान ! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

यहाँ 'नैया' का अर्थ 'शेष जीवन की यात्रा' या 'वृद्धावस्था' से है। ताई का भरा-पूरा परिवार बिखर चुका था। बेटे शहर चले गए और बेटियाँ ससुराल। उस बड़े से सूने घर में उन्हें अपना अकेलापन काटने को दौड़ता था। भविष्य की इसी चिंता और एकाकीपन से घबराकर वे गहरी साँस लेते हुए कहती हैं कि भगवान के सहारे बिना जीवन की यह कठिन नैया कैसे पार लगेगी।

Q2

"धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

यह वाक्य ताई के उस दुर्भाग्यपूर्ण अतीत की ओर संकेत करता है जब उनका भरा-पूरा परिवार बिखर गया। बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहर बस गए और जब कारबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा, तो मजबूरी में उनकी सारी खेती-बाड़ी, गाय-ढोर और संपत्ति धीरे-धीरे बिक गई या दूसरों (पराए हाथों) के अधिकार में चली गई।

Q3

"ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" क्यों?

ताई घर में बिल्कुल अकेली थीं और उनका मातृ-हृदय किसी को प्यार करने के लिए तरस रहा था। जब गनपत उनके सूनेपन को दूर करने के लिए एक प्यारा-सा तोता (मिट्ठू) ले आया, तो ताई को उसमें अपने खोए हुए परिवार और बच्चों की छवि दिखाई दी। मिट्ठू उनके बात करने का एकमात्र साधन (सहारा) बन गया, इसीलिए उनकी सारी रुकी हुई ममता उस पर बरस पड़ी।

Q4

"अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

  • यह दर्शाता है कि मिट्ठू के आने से ताई की उदासीनता और निराशा समाप्त हो गई थी।
  • जो ताई पहले अपने लिए खाना बनाने में भी आलस्य करती थीं (व्रत का बहाना कर लेती थीं), वे अब मिट्ठू की पसंद (हरी मिर्च, अमरूद) का ख्याल रखने के लिए बहुत सक्रिय और जागरूक हो गई थीं। उनके जीवन में एक नया उत्साह और उद्देश्य (जीने की चाह) आ गया था।
Q5

"जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

  • जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले, आदर्शवादी और करुणापूर्ण व्यक्ति थे।
  • उदाहरण: वे मानते थे कि किसी जीव को कैद में रखना पाप है। जब उनकी पत्नी ताई के तोते को घर ले आई, तो पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बहुत बेचैनी होती थी। वे दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने प्रायश्चित के रूप में मिट्ठू का पिंजरा खोल दिया ताकि वह खुली हवा का आनंद ले सके।
Q6

कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

कहानी का शीर्षक ताई और नए तोते (एवजी मिट्ठू) दोनों के लिए सार्थक प्रतीत होता है, लेकिन सबसे अधिक यह ताई की विडंबनापूर्ण स्थिति को दर्शाता है।

  • कारण: ताई का असली मिट्ठू उनके साथ संवाद करता था (राम-राम कहता था), जिससे उनका अकेलापन दूर होता था। लेकिन जब वे तीर्थ से लौटीं, तो उनके सामने पिंजरे में एक 'नया तोता' था जो बिल्कुल चुप (संवादहीन) था। उसने कोई हरकत नहीं की। यह संवादहीन तोता ताई के जीवन में वापस लौट आए उसी भयानक सन्नाटे, एकाकीपन और 'संवादहीनता' का प्रतीक बन गया, जिससे वे बचने का प्रयास कर रही थीं।