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"भगवान ! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
यहाँ 'नैया' का अर्थ 'शेष जीवन की यात्रा' या 'वृद्धावस्था' से है। ताई का भरा-पूरा परिवार बिखर चुका था। बेटे शहर चले गए और बेटियाँ ससुराल। उस बड़े से सूने घर में उन्हें अपना अकेलापन काटने को दौड़ता था। भविष्य की इसी चिंता और एकाकीपन से घबराकर वे गहरी साँस लेते हुए कहती हैं कि भगवान के सहारे बिना जीवन की यह कठिन नैया कैसे पार लगेगी।
"धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
यह वाक्य ताई के उस दुर्भाग्यपूर्ण अतीत की ओर संकेत करता है जब उनका भरा-पूरा परिवार बिखर गया। बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहर बस गए और जब कारबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा, तो मजबूरी में उनकी सारी खेती-बाड़ी, गाय-ढोर और संपत्ति धीरे-धीरे बिक गई या दूसरों (पराए हाथों) के अधिकार में चली गई।
"ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" क्यों?
ताई घर में बिल्कुल अकेली थीं और उनका मातृ-हृदय किसी को प्यार करने के लिए तरस रहा था। जब गनपत उनके सूनेपन को दूर करने के लिए एक प्यारा-सा तोता (मिट्ठू) ले आया, तो ताई को उसमें अपने खोए हुए परिवार और बच्चों की छवि दिखाई दी। मिट्ठू उनके बात करने का एकमात्र साधन (सहारा) बन गया, इसीलिए उनकी सारी रुकी हुई ममता उस पर बरस पड़ी।
"अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
"जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
कहानी का शीर्षक ताई और नए तोते (एवजी मिट्ठू) दोनों के लिए सार्थक प्रतीत होता है, लेकिन सबसे अधिक यह ताई की विडंबनापूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
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