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🪶 पाठ 6: रीढ़ की हड्डी

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?

  1. (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
  2. (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
  3. (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
  4. (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

सही उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।

'रीढ़ की हड्डी' (Backbone) यहाँ शारीरिक नहीं, बल्कि चारित्रिक और नैतिक बल का प्रतीक है। जो व्यक्ति आत्म-सम्मान से रहित, कायर और दूसरों की इच्छाओं पर निर्भर होता है (जैसे शंकर), उसे बिना 'रीढ़ की हड्डी' वाला कहा जाता है।

Q2

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

  1. (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
  2. (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
  3. (ग) विवाह और अशिक्षा पर
  4. (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं और दिखावे पर

सही उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं और दिखावे पर।

इस एकांकी में लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध करने वाली रूढ़िवादी सोच, विवाह के नाम पर लड़कियों की 'नाप-तौल' करने की प्रथा, और समाज के दोहरे मापदंडों (दिखावे) पर करारा व्यंग्य किया गया है।

Q3

"घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

  1. (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
  2. (ख) अनुभव और विवेक की कमी
  3. (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
  4. (घ) उदासीनता और एकाकीपन

सही उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।

उमा का यह कथन शंकर के उस कायरतापूर्ण चरित्र को उजागर करता है जब वह गर्ल्स हॉस्टल के चक्कर काटते हुए पकड़ा गया था और अपमानित होकर भागा था। उसका अपना कोई व्यक्तित्व या आत्मबल (रीढ़ की हड्डी) नहीं है।

Q4

"जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?

  1. (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
  2. (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
  3. (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
  4. (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

सही उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।

उमा मानती है कि शिक्षा कोई चोरी या पाप नहीं है। शिक्षा व्यक्ति को अपने मान-सम्मान की रक्षा करने का हौसला (आत्मबल) देती है और उसे अपने विचार स्वतंत्रतापूर्वक रखने के योग्य बनाती है।

Q5

गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

  1. (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
  2. (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
  3. (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
  4. (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

सही उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

गोपालप्रसाद पुरानी और रूढ़िवादी सोच के कारण कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं। वहीं रामस्वरूप प्रगतिशील (लड़की को बी.ए. पढ़ाने वाले) होते हुए भी समाज के झूठे दिखावे और दबाव में आकर अपनी बेटी की शिक्षा छिपाते हैं। इस प्रकार दोनों ही किसी न किसी रूप में झूठे दिखावे और सड़ी-गली परंपराओं के शिकार हैं।

Q6

इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

  1. (क) औपचारिक और शुष्क
  2. (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
  3. (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
  4. (घ) भावुक और संक्षिप्त

सही उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।

एकांकी के संवाद आम बोलचाल की भाषा में बहुत स्वाभाविक लगते हैं, लेकिन उनके भीतर तत्कालीन समाज की रूढ़िवादी मानसिकता और दोहरे चरित्र पर तीखा व्यंग्य छिपा हुआ है (जैसे खूबसूरती पर टैक्स की बात या औरतों की शिक्षा पर तर्क)।

Q1

बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।

रामस्वरूप के इस अंतर्द्वंद्व (अंतर्विरोध) के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • वे अपनी बेटी उमा को आधुनिक शिक्षा (बी.ए.) दिलाते हैं, लेकिन विवाह तय करते समय लड़के वालों (गोपालप्रसाद) के सामने डरपोक बनकर यह झूठ बोलते हैं कि वह केवल 'मैट्रिक' पास है।
  • वे गोपालप्रसाद के दकियानूसी (रूढ़िवादी) विचारों पर मन ही मन गुस्सा करते हैं, लेकिन सामने मुसकुराते हुए उनकी हर गलत और बेतुकी बात (जैसे शेरनी के बाल नहीं होते) का समर्थन करते हैं।
  • वे उमा पर पाउडर (मेकअप) लगाकर 'दिखावे' के साथ आने का दबाव डालते हैं, जो उनकी दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
Q2

'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

  • शंकर के लिए (शारीरिक और चारित्रिक अर्थ में): गोपालप्रसाद शंकर को डाँटते हुए कहते हैं, "झुककर क्यों बैठते हो? तुम्हारे दोस्त ठीक कहते हैं कि शंकर की 'बैकबोन'..." यहाँ यह उसकी शारीरिक दुर्बलता (झुकी हुई कमर) के लिए आया है। उमा के संवाद में यही शब्द शंकर की चारित्रिक कायरता और आत्मसम्मान की कमी के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  • उमा के लिए (नैतिक दृढ़ता के अर्थ में): उमा के पास शारीरिक रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ एक मजबूत 'चारित्रिक रीढ़ की हड्डी' (आत्म-सम्मान और निडरता) भी है। वह समाज के खोखले नियमों के सामने झुकती नहीं है बल्कि अन्याय का खुलकर प्रतिकार करती है।
Q3

"मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

  • प्रेमा की इस सोच से पता चलता है कि 1939 के तत्कालीन भारतीय समाज में स्त्री-शिक्षा को बिल्कुल भी महत्व नहीं दिया जाता था।
  • स्त्रियों की शिक्षा केवल थोड़ा-बहुत अक्षर ज्ञान, गिनती सीखने या 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी घरेलू किताबें पढ़ने तक ही सीमित थी। उच्च शिक्षा (बी.ए., एम.ए.) को स्त्रियों के लिए एक 'जंजाल' (झंझट) माना जाता था, जिससे विवाह में अड़चनें आती थीं।
Q4

लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

  • शीर्षक का कारण: रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा रखती है। लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि समाज को भी सीधे खड़े रहने के लिए प्रगतिशील विचारों और आत्म-सम्मान रूपी 'रीढ़ की हड्डी' की जरूरत होती है। शंकर जैसे चरित्रहीन और रामस्वरूप जैसे मजबूर लोग समाज को झुका देते हैं, जबकि उमा जैसी युवतियाँ समाज की सच्ची रीढ़ हैं।
  • दूसरा शीर्षक: मैं इसका दूसरा शीर्षक "सौदा नहीं, सम्मान" रखना चाहूँगा। कारण: पूरी एकांकी विवाह के नाम पर लड़कियों को वस्तु की तरह नाप-तौल कर खरीदने (सौदा करने) की मानसिकता के विरुद्ध उमा के आत्म-सम्मान की लड़ाई पर केंद्रित है।
Q1

एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए:
1. एकांकी का नाम
2. लेखक का नाम
3. पात्र
4. परिवेश/देश-काल
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश
6. संवाद-निर्देश
7. समस्या
8. संवाद
9. मुख्य विचार
10. समाधान/परिणाम

बिंदुउदाहरण (एकांकी से)
1. एकांकी का नामरीढ़ की हड्डी
2. लेखक का नामजगदीशचंद्र माथुर
3. पात्रउमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन
4. परिवेश/देश-कालसन् 1939 के आसपास का मध्यमवर्गीय शहरी परिवेश (जहाँ ग्रामोफोन, सितार, और विलायती चाय का चलन था)।
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश"(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की...)"
6. संवाद-निर्देश"(ज़रा तेज आवाज़ में)", "(चौंककर)", "(खँखारकर)"
7. समस्यास्त्री-शिक्षा का विरोध और विवाह में लड़कियों को भेड़-बकरियों की तरह 'नाप-तौल' कर परखना।
8. संवाद"गोपालप्रसाद : ...भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।"
9. मुख्य विचारलड़कियाँ निर्जीव वस्तु (मेज-कुर्सी) नहीं हैं, उनका भी अपना आत्म-सम्मान, हृदय और स्वतंत्र विचार होते हैं।
10. समाधान/परिणामउमा द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की सच्चाई को बेबाकी से उजागर करना, जिससे रिश्ता टूट जाता है और शोषक वर्ग को करारा जवाब मिलता है।
Q1

"जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं- यानी बैकबोन, बैकबोन!"

अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

संक्षिप्त टिप्पणी:

उमा का यह कथन केवल शंकर पर नहीं, बल्कि उस पूरी पितृसत्तात्मक सोच पर एक करारा तमाचा है जो स्वयं तो चरित्रहीन और कायर है, लेकिन अपने घर की बहू 'सर्वगुण संपन्न' और कम पढ़ी-लिखी चाहती है। शंकर गर्ल्स हॉस्टल में ताक-झाँक करता पकड़ा गया था; उसका न अपना कोई स्टैंड है और न ही आत्मविश्वास। उमा ने इस एक व्यंग्यात्मक वाक्य से यह स्पष्ट कर दिया कि जो व्यक्ति खुद 'रीढ़-विहीन' (कायर और चरित्रहीन) हो, उसे दूसरों की योग्यता को 'नाप-तौल' कर परखने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

Q1

एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?

एकांकी की पंक्तियाँ (भेदभाव दर्शाने वाली):

  • "अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं... तब तो हो चुकी गृहस्थी।"
  • "जनाब, मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।"
  • लड़के का मेडिकल कॉलेज में पढ़ना उसकी योग्यता माना जाता है, जबकि लड़की की उच्च शिक्षा को 'नखरे' भुगतने का कारण माना जाता है।

मेरी समझ: मैं इस भिन्नता को एक खोखली और अन्यायपूर्ण पितृसत्तात्मक मानसिकता के रूप में समझता हूँ। गोपालप्रसाद जैसे लोग शिक्षा को केवल आजीविका (मर्दों के काम) से जोड़ते हैं, जबकि वास्तव में शिक्षा एक मौलिक मानवीय अधिकार है जो पुरुष और स्त्री दोनों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए समान रूप से आवश्यक है। शेर या मोर का उदाहरण देकर स्त्रियों को शिक्षा से वंचित करना एक मूर्खतापूर्ण कुतर्क है।

Q2

"मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"

एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?

  • व्यक्तित्व की विशेषताएँ: उमा एक निडर, स्वाभिमानी, स्पष्टवादी और सशक्त लड़की है। वह समाज के दबाव के आगे झुककर चुपचाप अपमान सहने वाली निरीह 'भेड़-बकरी' नहीं है। उसे अपनी डिग्रियों (बी.ए.) और अपने सम्मान पर गर्व है।
  • ये विशेषताएँ कैसे आईं: उमा के व्यक्तित्व में यह दृढ़ता और आत्मविश्वास उच्च शिक्षा (कॉलेज की पढ़ाई) के कारण आया है। शिक्षा ने उसके भीतर सही और गलत की पहचान करने का 'विवेक' उत्पन्न किया है। यद्यपि उसके पिता रामस्वरूप डरपोक व्यवहार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने उमा को जो शिक्षा दिलाई, उसी ने उसे 'रीढ़ की हड्डी' वाला एक मजबूत चरित्र प्रदान किया।
Q1

एकांकी के अंत में रतन कहता है- "बाबूजी, मक्खन..." और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?

लेखक ने यह अंत एक मार्मिक व्यंग्य और हास्य उत्पन्न करने के लिए किया है। एकांकी की शुरुआत से ही मेहमानों के नाश्ते के लिए मक्खन मँगाया जा रहा था। रामस्वरूप 'मक्खन' (दिखावे और चापलूसी) लगाकर गोपालप्रसाद को खुश करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उमा की सच्चाई रूपी 'सूखी ब्रेड' ने उस 'मक्खन' की पोल खोल दी। अंततः जब रतन असली मक्खन लेकर आता है, तब तक गोपालप्रसाद रूपी मेहमान जा चुके होते हैं और सारा झूठा दिखावा (मक्खनबाज़ी) भी खत्म हो चुका होता है। यह एक सटीक और प्रतीकात्मक अंत है।

Q2

एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।

अनुमानित अगला दृश्य:

यदि परदा दोबारा उठेगा, तो हम देखेंगे कि बाबू रामस्वरूप अपनी कुर्सी पर सिर पकड़े बैठे हैं और प्रेमा उमा को रोता देख उसे सांत्वना दे रही है। अचानक रामस्वरूप उठकर उमा के सिर पर हाथ रखते हैं और कहते हैं, "उमा, तुम रो क्यों रही हो? मुझे अपनी कायरता पर शर्म आ रही है। तुमने बिल्कुल सही किया। तुमने मेरी आँखें खोल दीं। अब मैं कभी तुम्हारी शिक्षा को नहीं छिपाऊँगा। जिस घर में तुम्हारी शिक्षा और सम्मान का मोल नहीं, वहाँ मैं कभी तुम्हारा विवाह नहीं करूँगा।" उमा आँसू पोंछकर हलकी-सी मुसकुराहट के साथ अपने पिता को देखती है।

Q1

एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-

वाक्यमुहावरानया वाक्य
1. उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है- खाली हाथ।भीगी बिल्ली बनना (डरकर दब जाना)प्रिंसिपल को देखते ही कक्षा के सभी शरारती बच्चे भीगी बिल्ली बन गए।
2. लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।मुँह फुलाना (रूठ जाना)छोटी सी बात पर डाँट पड़ने पर रमन सुबह से मुँह फुलाए बैठा है।
3. और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?किस मर्ज की दवा होना (किस काम आना)तुम खुद को इंजीनियर कहते हो, अगर यह मशीन ठीक नहीं कर सकते तो फिर किस मर्ज की दवा हो?
4. तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।सिर चढ़ाना (बहुत अधिक छूट देना)माता-पिता ने बच्चों को इतना सिर चढ़ा रखा है कि वे किसी की बात नहीं सुनते।
5. मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।उगल देना (छिपी हुई बात बता देना)पुलिस की सख्ती के आगे चोर ने सारी सच्चाई उगल दी।
6. यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।काँटों में घसीटना (अत्यधिक शर्मिंदा करना / मुसीबत में डालना)आप मुझे इतनी बड़ी उपाधि देकर व्यर्थ ही काँटों में घसीट रहे हैं, मैं तो एक मामूली सेवक हूँ।
7. बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?इज्जत उतारना (अपमानित करना)भरी सभा में मेरे पिता की इज्जत उतारकर तुमने बहुत बड़ी भूल की है।
8. लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।मुँह छिपाना (लज्जित होना)चोरी पकड़े जाने के बाद वह गाँव वालों से मुँह छिपाता फिर रहा है।
Q2

"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।

सकारात्मक अर्थ में प्रयोग:

  • यदि पिता ने जिला स्तर पर कुश्ती जीती थी, तो उसके बेटे ने राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीत लिया; सच है, बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
  • सेठ जी अपनी ईमानदारी के लिए पूरे शहर में मशहूर थे, लेकिन उनके बेटे ने तो मुफ्त अस्पताल खुलवाकर साबित कर दिया कि बाप सेर है तो बेटा सवा सेर।