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🪶 पाठ 6: रीढ़ की हड्डी • सृजन

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Q1

एकांकी के अंत में रतन कहता है- "बाबूजी, मक्खन..." और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?

लेखक ने यह अंत एक मार्मिक व्यंग्य और हास्य उत्पन्न करने के लिए किया है। एकांकी की शुरुआत से ही मेहमानों के नाश्ते के लिए मक्खन मँगाया जा रहा था। रामस्वरूप 'मक्खन' (दिखावे और चापलूसी) लगाकर गोपालप्रसाद को खुश करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उमा की सच्चाई रूपी 'सूखी ब्रेड' ने उस 'मक्खन' की पोल खोल दी। अंततः जब रतन असली मक्खन लेकर आता है, तब तक गोपालप्रसाद रूपी मेहमान जा चुके होते हैं और सारा झूठा दिखावा (मक्खनबाज़ी) भी खत्म हो चुका होता है। यह एक सटीक और प्रतीकात्मक अंत है।

Q2

एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।

अनुमानित अगला दृश्य:

यदि परदा दोबारा उठेगा, तो हम देखेंगे कि बाबू रामस्वरूप अपनी कुर्सी पर सिर पकड़े बैठे हैं और प्रेमा उमा को रोता देख उसे सांत्वना दे रही है। अचानक रामस्वरूप उठकर उमा के सिर पर हाथ रखते हैं और कहते हैं, "उमा, तुम रो क्यों रही हो? मुझे अपनी कायरता पर शर्म आ रही है। तुमने बिल्कुल सही किया। तुमने मेरी आँखें खोल दीं। अब मैं कभी तुम्हारी शिक्षा को नहीं छिपाऊँगा। जिस घर में तुम्हारी शिक्षा और सम्मान का मोल नहीं, वहाँ मैं कभी तुम्हारा विवाह नहीं करूँगा।" उमा आँसू पोंछकर हलकी-सी मुसकुराहट के साथ अपने पिता को देखती है।