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🪶 पाठ 6: रीढ़ की हड्डी • मेरी समझ मेरे विचार

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Q1

बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।

रामस्वरूप के इस अंतर्द्वंद्व (अंतर्विरोध) के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • वे अपनी बेटी उमा को आधुनिक शिक्षा (बी.ए.) दिलाते हैं, लेकिन विवाह तय करते समय लड़के वालों (गोपालप्रसाद) के सामने डरपोक बनकर यह झूठ बोलते हैं कि वह केवल 'मैट्रिक' पास है।
  • वे गोपालप्रसाद के दकियानूसी (रूढ़िवादी) विचारों पर मन ही मन गुस्सा करते हैं, लेकिन सामने मुसकुराते हुए उनकी हर गलत और बेतुकी बात (जैसे शेरनी के बाल नहीं होते) का समर्थन करते हैं।
  • वे उमा पर पाउडर (मेकअप) लगाकर 'दिखावे' के साथ आने का दबाव डालते हैं, जो उनकी दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
Q2

'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

  • शंकर के लिए (शारीरिक और चारित्रिक अर्थ में): गोपालप्रसाद शंकर को डाँटते हुए कहते हैं, "झुककर क्यों बैठते हो? तुम्हारे दोस्त ठीक कहते हैं कि शंकर की 'बैकबोन'..." यहाँ यह उसकी शारीरिक दुर्बलता (झुकी हुई कमर) के लिए आया है। उमा के संवाद में यही शब्द शंकर की चारित्रिक कायरता और आत्मसम्मान की कमी के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  • उमा के लिए (नैतिक दृढ़ता के अर्थ में): उमा के पास शारीरिक रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ एक मजबूत 'चारित्रिक रीढ़ की हड्डी' (आत्म-सम्मान और निडरता) भी है। वह समाज के खोखले नियमों के सामने झुकती नहीं है बल्कि अन्याय का खुलकर प्रतिकार करती है।
Q3

"मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

  • प्रेमा की इस सोच से पता चलता है कि 1939 के तत्कालीन भारतीय समाज में स्त्री-शिक्षा को बिल्कुल भी महत्व नहीं दिया जाता था।
  • स्त्रियों की शिक्षा केवल थोड़ा-बहुत अक्षर ज्ञान, गिनती सीखने या 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी घरेलू किताबें पढ़ने तक ही सीमित थी। उच्च शिक्षा (बी.ए., एम.ए.) को स्त्रियों के लिए एक 'जंजाल' (झंझट) माना जाता था, जिससे विवाह में अड़चनें आती थीं।
Q4

लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

  • शीर्षक का कारण: रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा रखती है। लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि समाज को भी सीधे खड़े रहने के लिए प्रगतिशील विचारों और आत्म-सम्मान रूपी 'रीढ़ की हड्डी' की जरूरत होती है। शंकर जैसे चरित्रहीन और रामस्वरूप जैसे मजबूर लोग समाज को झुका देते हैं, जबकि उमा जैसी युवतियाँ समाज की सच्ची रीढ़ हैं।
  • दूसरा शीर्षक: मैं इसका दूसरा शीर्षक "सौदा नहीं, सम्मान" रखना चाहूँगा। कारण: पूरी एकांकी विवाह के नाम पर लड़कियों को वस्तु की तरह नाप-तौल कर खरीदने (सौदा करने) की मानसिकता के विरुद्ध उमा के आत्म-सम्मान की लड़ाई पर केंद्रित है।