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🪶 पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे !

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Q1

“भारति, जय, विजयकरे" कविता में विशेष रूप से-

  1. (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है।
  2. (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है।
  3. (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
  4. (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।

सही उत्तर: (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।

इस कविता में भारतभूमि की प्राकृतिक सुंदरता (पर्वत, नदियाँ, वन), ज्ञान (ओंकार, शतरव) और धन-धान्य (कनक-शस्य) से पूर्ण संपन्नता का अत्यंत उदात्त चित्रण व वंदना की गई है।

Q2

"कनक-शस्य-कमल धरे" पंक्ति का भावार्थ है-

  1. (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता
  2. (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य
  3. (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता
  4. (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास

सही उत्तर: (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।

'कनक' का अर्थ सोना, और 'शस्य' का अर्थ फसल होता है। यह पंक्ति भारत की स्वर्णिम कृषि-परंपरा और प्राकृतिक धन-धान्य से परिपूर्णता को दर्शाती है।

Q3

समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं-

  1. (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले
  2. (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल
  3. (ग) भारति, जय, विजयकरे / कनक-शस्य-कमलधरे !
  4. (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे !

सही उत्तर: (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे !

यह पंक्ति दर्शाती है कि भारत का ज्ञान ('ओंकार' की गूँज) और उसके श्रेष्ठ विचार अनेक स्वरों (शतरव) में सभी दिशाओं में गूँज रहे हैं, जो विश्व में उसके महत्व का उद्घोष करते हैं।

Q4

कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?

  1. (क) सरल, बोल-चाल की भाषा
  2. (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त
  3. (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण
  4. (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक

सही उत्तर: (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।

निराला जी ने इस कविता में 'कनक-शस्य-कमलधरे', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण' जैसे तत्सम (संस्कृतनिष्ठ) और सामासिक पदों का प्रचुरता से प्रयोग किया है, जो इसे अत्यंत ओजस्वी बनाता है।

Q5

भारत के वस्त्रों में 'तरु-तृण-वन-लता' और गले में 'गंगा-धारा' को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?

  1. (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक
  2. (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम
  3. (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक
  4. (घ) सामाजिक और राजनीतिक

सही उत्तर: (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।

पेड़, वन, लता और गंगा को भारत माता के वस्त्र और आभूषण (हार) बताकर कवि प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और भारत की सांस्कृतिक पवित्रता का संदेश देते हैं।

Q1

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) "लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल !"

  • अर्थ: भारत माता के पैरों के नीचे लंका एक कमल (शतदल) के समान स्थित है, और विशाल समुद्र अपनी गरजती हुई लहरों (गर्जितोर्मि) से उनके पवित्र (शुचि) दोनों चरणों (युगल) को निरंतर धो रहा है।
  • भाव: कवि ने यहाँ भारत की भौगोलिक स्थिति का अत्यंत भव्य मानवीकरण किया है। हिंद महासागर को भारत के चरणों में श्रद्धावनत एक सेवक के रूप में और लंका को चरणों में अर्पित कमल के फूल के रूप में दर्शाया गया है। यह भारत की महानता और प्राकृतिक दिव्यता को स्थापित करता है।
Q2

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-

(ख) "प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, / शतमुख-शतरव-मुखरे!"

  • अर्थ: भारत का प्राण ही 'ओंकार' (ॐ) का परम पवित्र और कल्याणकारी नाद है। यह नाद उदारतापूर्वक दसों दिशाओं में गूँज रहा है और भारत सैकड़ों मुखों (शतमुख) और सैकड़ों स्वरों (शतरव) में मुखरित होकर बोल रहा है।
  • भाव: यह पंक्ति भारत की ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाती है। भारत केवल एक भौगोलिक भूखंड नहीं है, बल्कि वह एक 'चेतन सत्ता' है। उसके वेद, उपनिषद और दार्शनिक विचार सम्पूर्ण विश्व को दिशा दिखा रहे हैं।
Q1

कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?

कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रगाढ़ राष्ट्रीयता, देशप्रेम और भारतभूमि के प्रति अपार श्रद्धा की भावना अभिव्यक्त हुई है। वे भारत को एक देवी या साक्षात आराध्य मानकर उसकी 'जय-विजय' की कामना करते हैं।

Q2

कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?

  • प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन: कवि ने भारत का मानवीकरण करते हुए वन, पेड़ों और लताओं (तरु-तृण-वन-लता) को उसके वस्त्र, पवित्र गंगा की धारा को गले का उजला हार, हिमालय की बर्फ को मुकुट, और सागर को उसके चरण धोने वाला बताया है।
  • प्रकृति संरक्षण और देशप्रेम: हाँ, प्रकृति का संरक्षण पूर्णतः देशप्रेम का ही काम है। जिस प्रकृति (नदियाँ, पर्वत, वन) से हमारे देश की पहचान है और जो हमारे जीवन का आधार है, यदि हम उसे ही नष्ट कर देंगे (प्रदूषित करेंगे), तो यह देश की जड़ों को खोखला करने जैसा होगा। अतः पर्यावरण की रक्षा मातृभूमि की ही रक्षा है।
Q3

"कनक-शस्य-कमलधरे!" पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?

यह पंक्ति भारत की तीन प्रमुख विशेषताओं की ओर संकेत करती है:

  1. कनक (सोना/संपन्नता): भारत की आर्थिक संपन्नता और खनिज संपदा।
  2. शस्य (फसल/कृषि): भारत की समृद्ध कृषि-परंपरा, उपजाऊ भूमि और लहलहाते खेत।
  3. कमलधरे (कमल को धारण करने वाली): भारत की पवित्रता, सांस्कृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक छटा (कमल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है)।
Q4

"मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?

भारत के सबसे उत्तर (शीर्ष) पर स्थित हिमालय पर्वत साल भर सफेद (शुभ्र) बर्फ (हिम-तुषार) से ढका रहता है। जिस प्रकार किसी राजा या देवी के मस्तक पर सुशोभित चमकता हुआ मुकुट उनके गौरव और गरिमा का प्रतीक होता है, उसी प्रकार हिमालय भारत के मस्तक पर विराजमान एक प्राकृतिक, उज्ज्वल और अभेद्य मुकुट के समान है जो देश के गौरव को बढ़ाता है और उसकी रक्षा करता है।

Q1

इस कविता की कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए-

  • प्रकृति का मानवीकरण
  • आलंकारिक प्रयोग
  • समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग
  • संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग
विशेषताकविता की पंक्तियाँ
प्रकृति का मानवीकरण"तरु-तृण-वन-लता वसन, / अंचल में खचित सुमन;" (प्रकृति को वस्त्र पहनाना)
आलंकारिक प्रयोग"मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" (रूपक अलंकार), "शतमुख-शतरव-मुखरे" (अनुप्रास अलंकार)
समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग"कनक-शस्य-कमलधरे!", "ज्योतिर्जल-कण"
संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग"गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल"
Q1

स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?

वर्तमान संदर्भ में मैं भारत को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और अंतरिक्ष विज्ञान (जैसे- इसरो, चंद्रयान) के एक वैश्विक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करूँगा। साथ ही, 'स्टार्ट-अप इंडिया' के तहत युवाओं के नवाचार (Innovation), डिजिटल इंडिया (UPI जैसी व्यवस्था), और चिकित्सा के क्षेत्र में (जैसे- विश्व को वैक्सीन देना) भारत की बढ़ती ताकत को भी इसमें सम्मिलित करूँगा। आधुनिक भारत अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजते हुए तकनीकी रूप से एक 'सुपरपावर' बनने की ओर अग्रसर है।

Q2

"शतमुख-शतरव-मुखरे!" पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करते हैं?

'शतमुख' और 'शतरव' का अर्थ है सैकड़ों मुख और स्वर। भारत में सैकड़ों भाषाएँ, बोलियाँ, धर्म और संस्कृतियाँ हैं। हर राज्य के अपने अलग-अलग पर्व और रीति-रिवाज (जैसे- दक्षिण में पोंगल, उत्तर में दीपावली और होली, पूरब में बिहू) हैं। परंतु इन सैकड़ों विविधताओं (शतरव) के बावजूद, इन सभी उत्सवों का मूल भाव—प्रेम, भाईचारा और प्रकृति का सम्मान—एक ही है। यह विविधता में एकता ही 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करती है।

Q3

कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?

वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण के कारण नदियों (जैसे गंगा और यमुना) का जल 'धवल' और 'शुचि' (पवित्र/स्वच्छ) नहीं रह गया है। औद्योगिक कचरे और प्लास्टिक ने इनके पानी को जहरीला कर दिया है। दूसरी ओर, जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण हिमालय (भारत का मुकुट) की बर्फ (हिम-तुषार) तेजी से पिघल रही है। इससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट हो रहा है, बल्कि भविष्य में नदियों के सूखने और भयंकर प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूस्खलन) का खतरा भी मँडरा रहा है।

Q1

कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

  • शतदल
  • ज्योतिर्जल
  • शतमुख
  • सागरजल
  • शतदल: शत (सौ) दलों (पंखुड़ियों) का समूह (द्विगु समास / बहुव्रीहि - कमल के अर्थ में)।
  • ज्योतिर्जल: ज्योति (प्रकाश) रूपी जल (कर्मधारय समास)।
  • शतमुख: शत (सौ) मुखों का समूह (द्विगु समास)।
  • सागरजल: सागर का जल (तत्पुरुष समास - संबंध तत्पुरुष)।
Q2

(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।

(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?

(क) अनुप्रास अलंकार (समान वर्णों की आवृत्ति):

  • "शतमुख-शतरव-मुखरे!" ('श' वर्ण की आवृत्ति)।
  • "प्राण प्रणव" ('प' और 'र' वर्ण की आवृत्ति)।

(ख) रूपक अलंकार (उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप):

  • "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार": यहाँ हिमालय की बर्फ को सीधे 'मुकुट' का रूप दे दिया गया है।
  • "धवल धार हार गले": यहाँ गंगा की उजली धारा को भारत माता के गले का 'हार' मान लिया गया है।
  • "तरु-तृण-वन-लता वसन": यहाँ पेड़, पौधों और लताओं को भारत माता के 'वस्त्र' (वसन) का रूप दिया गया है।