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“भारति, जय, विजयकरे" कविता में विशेष रूप से-
सही उत्तर: (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
इस कविता में भारतभूमि की प्राकृतिक सुंदरता (पर्वत, नदियाँ, वन), ज्ञान (ओंकार, शतरव) और धन-धान्य (कनक-शस्य) से पूर्ण संपन्नता का अत्यंत उदात्त चित्रण व वंदना की गई है।
"कनक-शस्य-कमल धरे" पंक्ति का भावार्थ है-
सही उत्तर: (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
'कनक' का अर्थ सोना, और 'शस्य' का अर्थ फसल होता है। यह पंक्ति भारत की स्वर्णिम कृषि-परंपरा और प्राकृतिक धन-धान्य से परिपूर्णता को दर्शाती है।
समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं-
सही उत्तर: (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे !
यह पंक्ति दर्शाती है कि भारत का ज्ञान ('ओंकार' की गूँज) और उसके श्रेष्ठ विचार अनेक स्वरों (शतरव) में सभी दिशाओं में गूँज रहे हैं, जो विश्व में उसके महत्व का उद्घोष करते हैं।
कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
सही उत्तर: (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
निराला जी ने इस कविता में 'कनक-शस्य-कमलधरे', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल-कण' जैसे तत्सम (संस्कृतनिष्ठ) और सामासिक पदों का प्रचुरता से प्रयोग किया है, जो इसे अत्यंत ओजस्वी बनाता है।
भारत के वस्त्रों में 'तरु-तृण-वन-लता' और गले में 'गंगा-धारा' को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
सही उत्तर: (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।
पेड़, वन, लता और गंगा को भारत माता के वस्त्र और आभूषण (हार) बताकर कवि प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और भारत की सांस्कृतिक पवित्रता का संदेश देते हैं।
नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) "लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल !"
नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-
(ख) "प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, / शतमुख-शतरव-मुखरे!"
कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रगाढ़ राष्ट्रीयता, देशप्रेम और भारतभूमि के प्रति अपार श्रद्धा की भावना अभिव्यक्त हुई है। वे भारत को एक देवी या साक्षात आराध्य मानकर उसकी 'जय-विजय' की कामना करते हैं।
कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
"कनक-शस्य-कमलधरे!" पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
यह पंक्ति भारत की तीन प्रमुख विशेषताओं की ओर संकेत करती है:
"मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
भारत के सबसे उत्तर (शीर्ष) पर स्थित हिमालय पर्वत साल भर सफेद (शुभ्र) बर्फ (हिम-तुषार) से ढका रहता है। जिस प्रकार किसी राजा या देवी के मस्तक पर सुशोभित चमकता हुआ मुकुट उनके गौरव और गरिमा का प्रतीक होता है, उसी प्रकार हिमालय भारत के मस्तक पर विराजमान एक प्राकृतिक, उज्ज्वल और अभेद्य मुकुट के समान है जो देश के गौरव को बढ़ाता है और उसकी रक्षा करता है।
इस कविता की कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए-
| विशेषता | कविता की पंक्तियाँ |
|---|---|
| प्रकृति का मानवीकरण | "तरु-तृण-वन-लता वसन, / अंचल में खचित सुमन;" (प्रकृति को वस्त्र पहनाना) |
| आलंकारिक प्रयोग | "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" (रूपक अलंकार), "शतमुख-शतरव-मुखरे" (अनुप्रास अलंकार) |
| समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग | "कनक-शस्य-कमलधरे!", "ज्योतिर्जल-कण" |
| संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग | "गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल" |
स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
वर्तमान संदर्भ में मैं भारत को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और अंतरिक्ष विज्ञान (जैसे- इसरो, चंद्रयान) के एक वैश्विक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करूँगा। साथ ही, 'स्टार्ट-अप इंडिया' के तहत युवाओं के नवाचार (Innovation), डिजिटल इंडिया (UPI जैसी व्यवस्था), और चिकित्सा के क्षेत्र में (जैसे- विश्व को वैक्सीन देना) भारत की बढ़ती ताकत को भी इसमें सम्मिलित करूँगा। आधुनिक भारत अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजते हुए तकनीकी रूप से एक 'सुपरपावर' बनने की ओर अग्रसर है।
"शतमुख-शतरव-मुखरे!" पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करते हैं?
'शतमुख' और 'शतरव' का अर्थ है सैकड़ों मुख और स्वर। भारत में सैकड़ों भाषाएँ, बोलियाँ, धर्म और संस्कृतियाँ हैं। हर राज्य के अपने अलग-अलग पर्व और रीति-रिवाज (जैसे- दक्षिण में पोंगल, उत्तर में दीपावली और होली, पूरब में बिहू) हैं। परंतु इन सैकड़ों विविधताओं (शतरव) के बावजूद, इन सभी उत्सवों का मूल भाव—प्रेम, भाईचारा और प्रकृति का सम्मान—एक ही है। यह विविधता में एकता ही 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करती है।
कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण के कारण नदियों (जैसे गंगा और यमुना) का जल 'धवल' और 'शुचि' (पवित्र/स्वच्छ) नहीं रह गया है। औद्योगिक कचरे और प्लास्टिक ने इनके पानी को जहरीला कर दिया है। दूसरी ओर, जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण हिमालय (भारत का मुकुट) की बर्फ (हिम-तुषार) तेजी से पिघल रही है। इससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट हो रहा है, बल्कि भविष्य में नदियों के सूखने और भयंकर प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूस्खलन) का खतरा भी मँडरा रहा है।
कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
(क) अनुप्रास अलंकार (समान वर्णों की आवृत्ति):
(ख) रूपक अलंकार (उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप):
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