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🪶 पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे ! • व्याकरण की बात

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Q1

कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

  • शतदल
  • ज्योतिर्जल
  • शतमुख
  • सागरजल
  • शतदल: शत (सौ) दलों (पंखुड़ियों) का समूह (द्विगु समास / बहुव्रीहि - कमल के अर्थ में)।
  • ज्योतिर्जल: ज्योति (प्रकाश) रूपी जल (कर्मधारय समास)।
  • शतमुख: शत (सौ) मुखों का समूह (द्विगु समास)।
  • सागरजल: सागर का जल (तत्पुरुष समास - संबंध तत्पुरुष)।
Q2

(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।

(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?

(क) अनुप्रास अलंकार (समान वर्णों की आवृत्ति):

  • "शतमुख-शतरव-मुखरे!" ('श' वर्ण की आवृत्ति)।
  • "प्राण प्रणव" ('प' और 'र' वर्ण की आवृत्ति)।

(ख) रूपक अलंकार (उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप):

  • "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार": यहाँ हिमालय की बर्फ को सीधे 'मुकुट' का रूप दे दिया गया है।
  • "धवल धार हार गले": यहाँ गंगा की उजली धारा को भारत माता के गले का 'हार' मान लिया गया है।
  • "तरु-तृण-वन-लता वसन": यहाँ पेड़, पौधों और लताओं को भारत माता के 'वस्त्र' (वसन) का रूप दिया गया है।