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🪶 पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे ! • अर्थ और भाव

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Q1

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) "लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल !"

  • अर्थ: भारत माता के पैरों के नीचे लंका एक कमल (शतदल) के समान स्थित है, और विशाल समुद्र अपनी गरजती हुई लहरों (गर्जितोर्मि) से उनके पवित्र (शुचि) दोनों चरणों (युगल) को निरंतर धो रहा है।
  • भाव: कवि ने यहाँ भारत की भौगोलिक स्थिति का अत्यंत भव्य मानवीकरण किया है। हिंद महासागर को भारत के चरणों में श्रद्धावनत एक सेवक के रूप में और लंका को चरणों में अर्पित कमल के फूल के रूप में दर्शाया गया है। यह भारत की महानता और प्राकृतिक दिव्यता को स्थापित करता है।
Q2

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-

(ख) "प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, / शतमुख-शतरव-मुखरे!"

  • अर्थ: भारत का प्राण ही 'ओंकार' (ॐ) का परम पवित्र और कल्याणकारी नाद है। यह नाद उदारतापूर्वक दसों दिशाओं में गूँज रहा है और भारत सैकड़ों मुखों (शतमुख) और सैकड़ों स्वरों (शतरव) में मुखरित होकर बोल रहा है।
  • भाव: यह पंक्ति भारत की ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाती है। भारत केवल एक भौगोलिक भूखंड नहीं है, बल्कि वह एक 'चेतन सत्ता' है। उसके वेद, उपनिषद और दार्शनिक विचार सम्पूर्ण विश्व को दिशा दिखा रहे हैं।