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🪶 पाठ 8: रैदास (पद) • झरोखे से

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Q1

अब अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि रैदास तथा नामदेव के पदों में क्या-क्या अंतर है और क्या-क्या समानताएँ हैं?

  • समानताएँ: रैदास और नामदेव दोनों ही निर्गुण काव्य परंपरा के संत हैं। दोनों ने ही बाह्य आडंबरों (कर्मकांडों, शास्त्रों, वेदों) का विरोध किया है और ईश्वर प्राप्ति के लिए सच्चे गुरु की कृपा (सतगुर मोहि लखाया) तथा मन की निर्मल भक्ति (राम नाम) को अनिवार्य बताया है।
  • अंतर: रैदास के पदों में मुख्य रूप से भक्त और भगवान के अटूट संबंध को लौकिक उपमाओं (दीपक-बाती, चंदन-पानी) से दर्शाया गया है (समर्पण भाव)। जबकि नामदेव के पदों में राम के बिना तड़प और बेचैनी को दर्शाने के लिए पारिवारिक और वियोग के प्रतीकों (जैसे- बछड़े के बिना गाय की तड़प, पानी के बिना मछली) का प्रयोग अधिक हुआ है।