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🪶 पाठ 8: रैदास (पद) • सृजन

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Q1

कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।

संवाद-लेखन:

  • प्रभु: हे भक्त! तुम मेरे ध्यान में इतने लीन क्यों रहते हो?
  • भक्त (रैदास): हे नाथ! आप चंदन हैं और मैं पानी हूँ। आपके बिना मेरा कोई वजूद नहीं। आपके संग मिलकर ही मेरे जीवन में सुगंध आती है।
  • प्रभु (मुसकराते हुए): पर तुम तो खुद भी एक सुंदर धागे के समान हो।
  • भक्त: वह धागा तो साधारण है, जब तक आप 'मोती' बनकर उस धागे में न पिरोए जाएँ। आपके बिना मैं सूना हूँ, जैसे सुहागे के बिना सोने की चमक फीकी होती है।
  • प्रभु: तुम्हारी यह अनन्य निष्ठा देखकर मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।
Q2

"जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ" पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।

लघुकथा: अटूट मित्रता

रामू और श्यामू बचपन के अभिन्न मित्र थे। एक बार किसी गलतफहमी के कारण श्यामू ने रामू से बात करना बंद कर दिया और उससे रिश्ता तोड़ने की ठान ली। श्यामू जब भी रामू को देखता, रास्ता बदल लेता। लेकिन रामू ने कभी बुरा नहीं माना। जब श्यामू बीमार पड़ा और उसे खून की सख्त जरूरत थी, तो रामू बिना सोचे समझे अस्पताल पहुँचा और अपना खून देकर उसकी जान बचाई। होश आने पर श्यामू रोते हुए बोला, "मैंने तो तुमसे सारे रिश्ते तोड़ दिए थे, फिर तुम क्यों आए?" रामू ने मुसकरा कर कहा, "दोस्ती तुमने तोड़ी थी, मैंने नहीं! जो तुम तोड़ो, मैं नहीं तोड़ूँगा।" यह सुनकर श्यामू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उनकी मित्रता पहले से भी अधिक गहरी हो गई।