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🪶 पाठ 8: रैदास (पद) • विषयों से संवाद

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Q1

तीर्थ और व्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं?

  • 15वीं-16वीं शताब्दी का समय भारतीय समाज में धार्मिक कट्टरता, जाति-पाँति के भेदभाव और छुआछूत का काल था।
  • धर्म के नाम पर पंडों-पुजारियों का बोलबाला था, और कर्मकांडों (जैसे तीर्थ, व्रत, बलि) ने धर्म को जटिल और महँगा बना दिया था, जिससे गरीब और निम्न वर्ग के लोग ईश्वर से दूर हो रहे थे।
  • समाज को इस पाखंड और वर्ण-व्यवस्था से मुक्त करने के लिए ही कबीर और रैदास जैसे संतों ने बाहरी आडंबरों का विरोध किया। उन्होंने संदेश दिया कि ईश्वर निराकार है और वह हर मनुष्य के भीतर मौजूद है; उसे पाने के लिए किसी मंदिर, तीर्थ या विशेष जाति की नहीं, बल्कि केवल सच्चे प्रेम और शुद्ध मन की आवश्यकता है।
Q2

"सोने मिलत सुहागा" - 'सुहागा' एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। 'सुहागा' का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए।

  • रासायनिक नाम: सुहागा का वैज्ञानिक/रासायनिक नाम सोडियम टेट्राबोरेट डेकाहाइड्रेट (Sodium tetraborate decahydrate) है, जिसे आम बोलचाल में बोरैक्स (Borax - Na₂B₄O₇·10H₂O) कहते हैं।
  • विशेषताएँ: यह एक सफेद रंग का क्रिस्टलीय खनिज है जो पानी में घुलनशील होता है। इसका उपयोग सोने को पिघलाते समय गालक (Flux) के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह सोने के गलनांक (Melting point) को कम करता है और उसके अंदर मौजूद अशुद्धियों को जलाकर सोने को शुद्ध और अत्यधिक चमकदार बना देता है।