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🪶 पाठ 8: रैदास (पद) • मेरे उत्तर मेरे तर्क

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

"अब कैसे छूटै राम रट लागी" पंक्ति का भाव है?

  1. (क) नाम उच्चारण की कठिनाई
  2. (ख) नाम रटकर याद करना
  3. (ग) आराध्य का नाम जपना
  4. (घ) मित्रों का नाम रटना

सही उत्तर: (ग) आराध्य का नाम जपना।

यहाँ 'राम रट' का अर्थ आराध्य (ईश्वर) के नाम का निरंतर स्मरण और जप करने की लगन से है, जो अब भक्त (रैदास) से छूट नहीं सकती।

Q2

"प्रभु जी तुम चंदन हम पानी" पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है?

  1. (क) एकाकार और समरूप
  2. (ख) तरल और तीव्र सुगंध
  3. (ग) आश्रय और आश्रित
  4. (घ) द्रव और ठोस

सही उत्तर: (क) एकाकार और समरूप।

जिस प्रकार पानी में घिसने पर चंदन पानी के अंग-अंग में समाकर उसे सुगंधित कर देता है, उसी प्रकार प्रभु की भक्ति भक्त के अंग-अंग में समाकर उसे एकाकार और पवित्र कर देती है।

Q3

"तुम दीपक, हम बाती" से रैदास का क्या भाव है?

  1. (क) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है।
  2. (ख) दीपक बिना बाती भी जल सकता है।
  3. (ग) भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है।
  4. (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

सही उत्तर: (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

जिस प्रकार दीपक में जलने वाली बाती प्रकाश फैलाती है, उसी प्रकार भक्त ईश्वर (दीपक) के प्रेम में जलकर (दिन-रात समर्पित रहकर) अपना जीवन आलोकित करता है।

Q4

"जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ" पंक्ति में रैदास का क्या आशय है?

  1. (क) परोपकारी भक्ति भाव
  2. (ख) आराध्य से अटूट संबंध
  3. (ग) सांसारिक मोह
  4. (घ) कर्मकांड पर बल

सही उत्तर: (ख) आराध्य से अटूट संबंध।

भक्त रैदास स्पष्ट कहते हैं कि चाहे ईश्वर उनसे संबंध तोड़ लें, लेकिन वे अपनी ओर से ईश्वर से जुड़ा यह अटूट प्रेम का नाता कभी नहीं तोड़ेंगे।

Q5

"तीरथ बरत न करूँ अंदेसा" पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

  1. (क) तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं।
  2. (ख) तीर्थ और व्रत सब आवश्यक हैं।
  3. (ग) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है।
  4. (घ) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

सही उत्तर: (घ) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

रैदास कहते हैं कि उन्हें किसी तीर्थ या व्रत पर विश्वास (अंदेसा/आशंका) नहीं है, उन्हें केवल अपने आराध्य (प्रभु) के चरण कमलों का ही एकमात्र भरोसा और आश्रय है।

Q6

सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है?

  1. (क) "जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा"
  2. (ख) "जाकी जोति बरै दिन राती"
  3. (ग) "तुम दीपक, हम बाती"
  4. (घ) "तीरथ बरत न करूँ अंदेसा"

सही उत्तर: (क) "जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा"।

यह पंक्ति दर्शाती है कि ईश्वर कण-कण में विद्यमान है (सर्वव्यापक है), इसलिए भक्त जहाँ भी जाता है, उसे केवल अपने आराध्य की ही उपस्थिति और पूजा दिखाई देती है।