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🪶 पाठ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Verified step-by-step solutions for your class notes.

Q1

"पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।" यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?

  1. (क) आदर और सम्मान
  2. (ख) भक्ति और श्रद्धा
  3. (ग) भय और शिष्टाचार
  4. (घ) प्रेम और सहिष्णुता

सही उत्तर: (ग) भय और शिष्टाचार।

परशुराम का भयंकर रूप (बेषु कराला) देखकर सभी राजा भयभीत (भय बिकल) हो गए और डर के कारण शिष्टाचारवश अपने पिता और अपना नाम ले-लेकर उन्हें दंडवत प्रणाम करने लगे।

Q2

"जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा" पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?

  1. (क) संवेदनशीलता
  2. (ख) शिष्टता
  3. (ग) सहनशीलता
  4. (घ) उदासीनता

सही उत्तर: (ख) शिष्टता।

राजा जनक द्वारा परशुराम को सिर झुकाकर प्रणाम करना और सीता को बुलाकर उनसे भी प्रणाम करवाना उनके विनम्र और शिष्ट आचरण को दर्शाता है।

Q3

"अति रिस बोले बचन कठोरा।" जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था-

  1. (क) उचित आदर-सत्कार न मिलना
  2. (ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना
  3. (ग) शिव-धनुष का खंडित होना
  4. (घ) अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति

सही उत्तर: (ग) शिव-धनुष का खंडित होना।

परशुराम शिव के अनन्य भक्त थे। सभा में शिव-धनुष के टुकड़े (चापखंड) धरती पर पड़े देखकर वे अत्यधिक क्रोधित (अति रिस) हो गए और जनक से कठोर वचन बोले।

Q4

राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा" उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?

  1. (क) कूटनीति और चतुराई
  2. (ख) विनम्रता और मर्यादा
  3. (ग) त्याग और समर्पण
  4. (घ) दृढ़ता और आत्मविश्वास

सही उत्तर: (ख) विनम्रता और मर्यादा।

स्वयं शिव-धनुष तोड़ने वाले पराक्रमी होते हुए भी, श्रीराम ने अत्यंत शांत भाव से स्वयं को परशुराम का दास कहा, जो उनकी असीम विनम्रता, शील और मर्यादा का सूचक है।

Q5

"सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।" लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?

  1. (क) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे।
  2. (ख) उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था।
  3. (ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे।
  4. (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।

सही उत्तर: (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।

लक्ष्मण को लगा कि एक पुरानी धनुही के टूटने पर परशुराम का इतना क्रोध करना अनुचित है। वे परशुराम के अहंकार को चुनौती देने और उनका उपहास करने के लिए व्यंग्यपूर्ण वचनों का प्रयोग कर रहे थे।

Q1

"अरध निमेष कलप सम बीता" पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?

  • यह पंक्ति सीता जी के संदर्भ में कही गई है।
  • भाव: 'अरध निमेष' का अर्थ है आधा पल और 'कलप' का अर्थ है युग (कल्प)। परशुराम के भयंकर स्वभाव को सुनकर सीता जी अत्यंत भयभीत हो गईं। उन्हें राम के मंगल की चिंता सताने लगी, जिसके कारण उनका आधा पल भी एक लंबे युग के समान कठिनाई से बीत रहा था।
Q2

"सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।" पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

  • परशुराम ने चेतावनी दी कि जिसने धनुष तोड़ा है, वह सभा से अलग हो जाए, अन्यथा सभी राजा मारे जाएँगे।
  • प्रभाव: इस भयंकर चेतावनी से सभा में उपस्थित सभी राजा अत्यंत भयभीत और आतंकित हो गए होंगे।
  • तर्क: परशुराम की अपार शक्ति और उनके फरसे से सभी परिचित थे। निर्दोष होने पर भी मृत्यु के भय ने राजाओं को चिंता में डाल दिया होगा, और वे अपनी जान बचाने के उपायों के बारे में सोचने लगे होंगे।
Q3

तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का 'विनय' का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के 'तर्क' का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।

  • मेरी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का 'विनय' (विनम्रता) का मार्ग ही उचित है।
  • तर्क: क्रोधी व्यक्ति पहले ही विवेक खो चुका होता है। लक्ष्मण के तर्क और व्यंग्य ने परशुराम के क्रोध की अग्नि में घी का काम किया और स्थिति को बिगाड़ दिया। इसके विपरीत, राम की शालीनता, धैर्य और मधुर वचनों ने अंततः परशुराम के अहंकार और क्रोध को शांत किया। "आग को पानी से ही बुझाया जा सकता है, आग से नहीं"।
Q4

'हृदयं न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।।' श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?

  • यह श्रीराम के स्थितप्रज्ञ, धैर्यवान, संयमित और शांत व्यक्तित्व को दर्शाता है। वे सफलता (धनुष तोड़ने) के अहंकार और संकट (परशुराम के क्रोध) के भय से पूरी तरह मुक्त हैं।
  • अन्य पात्रों से भिन्नता: जहाँ अन्य राजा भयभीत हैं, कुटिल राजा ईर्ष्यालु हैं, लक्ष्मण उग्र हैं, और परशुराम क्रोधी हैं, वहीं श्रीराम एकमात्र ऐसे पात्र हैं जो इस उथल-पुथल में भी पूर्णतः संतुलित और शांत हैं। उनका यह संतुलन उन्हें एक आदर्श और श्रेष्ठ नायक सिद्ध करता है।
Q1

कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

(काल्पनिक वृत्तांत): मैं सीता स्वयंवर में राजा जनक की सभा में बैठा था। अचानक भयंकर वेशभूषा में मुनि परशुराम हाथ में फरसा लिए आ पहुँचे। उनका रौद्र रूप देखकर हम सब काँप उठे और प्राणों के मोह में अपने पिता का नाम ले-लेकर उन्हें प्रणाम करने लगे। जब उन्होंने शिव-धनुष को टूटा देखा, तो क्रोध से उबल पड़े। श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता से उत्तर दिया, परंतु लक्ष्मण जी के तीखे व्यंग्य बाणों ने परशुराम जी के क्रोध को और भड़का दिया। हम सब अपनी जान की खैर मना रहे थे। अंततः श्रीराम की विनय और अलौकिक प्रभाव से परशुराम जी शांत हुए और वन की ओर लौट गए। तब जाकर हमने राहत की साँस ली।

Q2

"अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।" जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?

  • प्रसन्न होने का कारण: कुटिल (दुष्ट) राजा इसलिए प्रसन्न हुए क्योंकि वे स्वयं शिव-धनुष तोड़ने में विफल रहे थे और राम की सफलता से जल रहे थे।
  • परशुराम को क्रोधित देखकर उन्हें लगा कि अब राम और जनक को इस कार्य का भारी दंड मिलेगा और उनकी सफलता मिट्टी में मिल जाएगी।
  • मानव व्यवहार की सच्चाई: यह मनुष्य की उस हीन मानसिकता और ईर्ष्यालु स्वभाव को उजागर करता है जिसमें व्यक्ति अपनी विफलता को स्वीकार करने के बजाय दूसरों की सफलता पर जलता है और उनके विनाश में आनंद ढूँढ़ता है।
Q1

नीचे कविता के संवादों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। उन विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियों के उदाहरण कविता से ढूँढ़कर लिखिए।

  • राम की विनम्रता
  • परशुराम का रौद्र रूप
  • लक्ष्मण का प्रत्युत्तर
  • पौराणिक संदर्भ
  • नाटकीयता
विशेषताकविता की पंक्तियाँ
राम की विनम्रता"नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।"
परशुराम का रौद्र रूप"सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।"
लक्ष्मण का प्रत्युत्तर"बहु धनुहीं तोरीं लरिकाई। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।"
पौराणिक संदर्भ"धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।" (त्रिपुरारी/सहस्रबाहु का उल्लेख)
नाटकीयता"देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।"
Q1

"अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं।" परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।

  • संदर्भ: यह स्थिति तब आई जब परशुराम सभा में आकर क्रोधित होकर जनक से पूछते हैं कि यह भीड़ क्यों है और धनुष किसने तोड़ा है।
  • कारण और प्रभाव: जनक का मौन भय और विवेक दोनों का मिश्रण है। परशुराम का क्रोध चरम पर था। यदि जनक कुछ कहते तो वह परशुराम की क्रोधाग्नि को और भड़का सकता था, जिससे पूरी सभा का विनाश संभव था।
  • निष्कर्ष: इससे स्पष्ट होता है कि जनक ने मौन रहकर स्थिति को सँभालने का विवेकपूर्ण प्रयास किया, क्योंकि वे जानते थे कि बिना सोचे-समझे दिया गया उत्तर अनर्थ कर सकता है।
Q2

काव्य-पंक्ति: "रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।"

(क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?

(ख) निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे- परशुराम, राजा जनक, लक्ष्मण, राम, सभा में उपस्थित अन्य राजा?

  • (क) चेहरे का भाव: यदि मैं यह पंक्ति मंच पर बोलता, तो मेरे चेहरे पर अत्यधिक क्रोध, अहंकार और रौद्र रूप होता। भृकुटी तनी हुई होती और आँखें क्रोध से लाल होतीं।
  • (ख) पात्रों के भाव:
    • परशुराम: अत्यधिक क्रोध, उग्रता और अहंकार।
    • राजा जनक: चिंता, भय और धैर्य (विवेक)।
    • लक्ष्मण: व्यंग्य, उपहास, निडरता और उत्साह।
    • राम: असीम विनम्रता, शांति, मर्यादा और स्थितप्रज्ञता।
    • अन्य राजा: मृत्यु का भय, आतंक और कुटिल राजाओं में ईर्ष्या/प्रसन्नता।
Q1

सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदात्त चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।

  • हमें अपने दैनिक जीवन में कई ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ राम जैसे धैर्य और विनम्रता की आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: जब कोई दूसरा व्यक्ति (मित्र, सहकर्मी या अनजान व्यक्ति) अकारण अत्यधिक क्रोधित हो जाए; जब परिवार या समाज में कोई विवाद उत्पन्न हो जाए; अथवा जब हमें किसी नेतृत्व (लीडरशिप) की भूमिका में विपरीत विचारों वाले लोगों के बीच सामंजस्य बिठाना हो।
  • ऐसे समय में उत्तेजित होने के बजाय शांत और मर्यादित रहकर ही समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।
Q2

कविता में वर्णित प्रसंग सीता स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक आदि घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।

पौराणिक उदाहरण - द्रौपदी स्वयंवर:

महाभारत में पांचाल नरेश राजा द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रौपदी के विवाह के लिए एक विशाल स्वयंवर का आयोजन किया था। इसमें एक शर्त रखी गई थी कि नीचे रखे तेल के खौलते कड़ाह में प्रतिबिंब देखकर ऊपर छत पर घूमती हुई मछली की आँख को जो भी योद्धा तीर से बेधेगा, उसी से द्रौपदी का विवाह होगा। अनेक पराक्रमी राजा इसमें विफल रहे। अंततः, ब्राह्मण वेश में आए अर्जुन ने अपने अद्भुत कौशल से मछली की आँख बेध दी और स्वयंवर की शर्त पूरी कर द्रौपदी का वरण किया।

Q1

परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।

मौन संवाद:

माता सुनयना (आँखों ही आँखों में चिंता से): "पुत्री सीते, न जाने विधाता ने हमारे भाग्य में क्या लिख रखा है! अभी तो तुम्हारी खुशी का क्षण आया था, और अब मुनि परशुराम के इस भयंकर क्रोध को देखकर मेरा हृदय काँप रहा है।"
सीता (झुकी हुई पलकों और डबडबाई आँखों से): "माता, मेरा आधा पल भी एक युग के समान बीत रहा है। यद्यपि श्रीराम का शांत और धैर्यवान मुखमंडल मुझे कुछ ढाँढस बँधा रहा है, परंतु मुनिराज का फरसा और क्रोध मेरे मन में अमंगल की भारी आशंका उत्पन्न कर रहा है। हे शिव, सब कुशल करना।"

Q2

सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।

सीता का दृष्टिकोण:

  • प्रसन्नता और शंका: जैसे ही श्रीराम ने शिव-धनुष तोड़ा, सीता के मन में अपार हर्ष हुआ। परंतु परशुराम के आ धमकने से वह हर्ष तुरंत भय और शंका में बदल गया।
  • भय और चिंता: परशुराम के रौद्र रूप और मृत्यु की चेतावनियों को सुनकर सीता का हृदय काँप उठा कि कहीं श्रीराम के प्राणों पर संकट न आ जाए।
  • लक्ष्मण के प्रत्युत्तर पर भाव: जब लक्ष्मण ने परशुराम का उपहास किया, तो सीता को एक ओर लक्ष्मण के साहस पर विस्मय हुआ होगा, और दूसरी ओर यह चिंता सताई होगी कि इस व्यंग्य से मुनि का क्रोध और न भड़क जाए।
  • गर्व और राहत: अंत में, जब उन्होंने श्रीराम को अत्यंत शांति और विनय के साथ स्थिति को सँभालते देखा, तो उनके मन में अपने भावी पति की मर्यादा और बुद्धिमत्ता पर गर्व और राहत का अनुभव हुआ होगा।
Q3

कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।

मेरा परिचय (एक छात्र के रूप में):

मेरा नाम [अपना नाम लिखें] है। मैं अहंकार और दिखावे के बजाय अपनी मेहनत, ईमानदारी और सरलता से पहचाना जाना पसंद करता हूँ। मैं किसी भी चुनौती या कठिन परिस्थिति का सामना धैर्य और शांति से करने का प्रयास करता हूँ। मुझे दूसरों की सहायता करना और नई चीजें सीखना बहुत पसंद है। मेरा मानना है कि मनुष्य की असली श्रेष्ठता उसके विनम्र व्यवहार और सकारात्मक विचारों में ही निहित होती है।

Q1

इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे- दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।

  • अनुप्रास अलंकार (एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति) - उदाहरण: अरि करनी करि करिअ लराई
  • अतिशयोक्ति अलंकार (बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना) - उदाहरण: अरध निमेष कलप सम बीता
  • रूपक अलंकार (रूप का आरोपण करना) - उदाहरण: पद सरोज मेले दोउ भाई

अन्य उदाहरण:

विशेषताअन्य उदाहरण
अनुप्रास अलंकार"कहि कहि निज नामा" ('क' वर्ण की आवृत्ति)
अतिशयोक्ति अलंकार"सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" (सहस्रबाहु के समान भयंकर शत्रु मानना)
रूपक अलंकार"भृगुकुलकेतू" (भृगुवंश रूपी ध्वजा)
Q2

यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है... कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं, जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए।

अवधी शब्दखड़ी बोली का शब्द
कोहीक्रोधी
बेषुवेष / वेशभूषा
लरिकाईलड़कपन / बचपन में
रिसक्रोध / गुस्सा
आयसुआज्ञा / आदेश
Q3

नीचे कोष्ठक में कविता से कुछ शब्द चुनकर दिए गए हैं। उन शब्दों से संबंधित लोकोक्ति और उनका अर्थ लिखकर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए। (शब्द: राम, राजा, बात, सिरु)

शब्दलोकोक्तिअर्थ एवं वाक्य प्रयोग
मनमन के हारे हार है, मन के जीते जीत।अर्थ: आत्मविश्वास से सफलता मिलती है।
वाक्य: परीक्षा कठिन है पर मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
रामराम भरोसे हिंदू होटल।अर्थ: कार्य भगवान के भरोसे छोड़ देना।
वाक्य: उस दुकान का तो राम भरोसे हिंदू होटल वाला हाल है।
राजाकहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली।अर्थ: दो असमान स्तर के व्यक्तियों की तुलना।
वाक्य: उस सेठ और इस मजदूर की तुलना कैसी, कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली।
बातबात का बतंगड़ बनाना।अर्थ: छोटी सी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा देना।
वाक्य: कुछ लोगों को छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने की आदत होती है।
सिरु (सिर)सिर मुँडाते ही ओले पड़ना।अर्थ: कार्य आरंभ करते ही बाधा उत्पन्न होना।
वाक्य: नई दुकान खोली और लॉकडाउन लग गया, इसे कहते हैं सिर मुँडाते ही ओले पड़ना।
Q4

नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए-
"अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।"

गद्य-रूप:

अत्यधिक डर के कारण राजा जनक कोई उत्तर नहीं दे रहे हैं। (यह देखकर) कुटिल स्वभाव वाले राजा अपने मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहे हैं। देवता, मुनि, नाग और नगर के सभी स्त्री-पुरुषों के हृदय में बड़ा भारी भय समा गया है और वे सभी गहरी चिंता में डूब गए हैं।

Q1

मिलान कीजिए (कथन को सही पात्र से जोड़िए):

  • शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही हो सकता है।
  • विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी।
  • सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे।
  • इस कारण ये सब राजा आए हैं।
  • बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डाली हैं।
  • क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?
  • कहो जनक, किस कारण यह भीड़ है?
  • इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों!
  • शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही हो सकता है। → राम
  • विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी। → सीता की माता (सुनयना)
  • सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे। → परशुराम
  • इस कारण ये सब राजा आए हैं। → राजा जनक
  • बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डाली हैं। → लक्ष्मण
  • क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? → राम
  • कहो जनक, किस कारण यह भीड़ है? → परशुराम
  • इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों! → लक्ष्मण
Q2

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अब अपने समूह में मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
समाचार, धनुष, मन, नाग, नगर

(उदाहरणस्वरूप पहेलियाँ)

  • समाचार: "कागज पर मैं छप कर आता, दुनिया भर की खबर सुनाता। सुबह-सुबह मैं घर-घर जाता, बताओ मैं क्या कहलाता?"
  • धनुष: "लकड़ी की मेरी है काया, डोरी से है मुझे झुकाया। बाण चलाऊँ मैं दूर-दूर तक, शिव ने मुझे उठाया।"
  • मन: "बिन पंख के मैं उड़ जाता हूँ, पल में यहाँ, पल में वहाँ जाता हूँ। शरीर में रहकर भी दिखाई न देता, बताओ मैं क्या कहलाता हूँ?"
  • नाग: "फन उठाकर मैं फुफकारूँ, बिन पैर के मैं रेंगता जाऊँ। शिव जी के गले का मैं हार, बताओ क्या है मेरा नाम?"
  • नगर: "बहुत से घर और बाजार हैं यहाँ, गाड़ियाँ दौड़ें बारंबार यहाँ। गाँव से बड़ा है मेरा आकार, बताओ मुझे क्या कहते यार?"