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🪶 पाठ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद • विषयों से संवाद

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Q1

सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदात्त चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।

  • हमें अपने दैनिक जीवन में कई ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ राम जैसे धैर्य और विनम्रता की आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: जब कोई दूसरा व्यक्ति (मित्र, सहकर्मी या अनजान व्यक्ति) अकारण अत्यधिक क्रोधित हो जाए; जब परिवार या समाज में कोई विवाद उत्पन्न हो जाए; अथवा जब हमें किसी नेतृत्व (लीडरशिप) की भूमिका में विपरीत विचारों वाले लोगों के बीच सामंजस्य बिठाना हो।
  • ऐसे समय में उत्तेजित होने के बजाय शांत और मर्यादित रहकर ही समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।
Q2

कविता में वर्णित प्रसंग सीता स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक आदि घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।

पौराणिक उदाहरण - द्रौपदी स्वयंवर:

महाभारत में पांचाल नरेश राजा द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रौपदी के विवाह के लिए एक विशाल स्वयंवर का आयोजन किया था। इसमें एक शर्त रखी गई थी कि नीचे रखे तेल के खौलते कड़ाह में प्रतिबिंब देखकर ऊपर छत पर घूमती हुई मछली की आँख को जो भी योद्धा तीर से बेधेगा, उसी से द्रौपदी का विवाह होगा। अनेक पराक्रमी राजा इसमें विफल रहे। अंततः, ब्राह्मण वेश में आए अर्जुन ने अपने अद्भुत कौशल से मछली की आँख बेध दी और स्वयंवर की शर्त पूरी कर द्रौपदी का वरण किया।