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इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे- दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।
अन्य उदाहरण:
| विशेषता | अन्य उदाहरण |
|---|---|
| अनुप्रास अलंकार | "कहि कहि निज नामा" ('क' वर्ण की आवृत्ति) |
| अतिशयोक्ति अलंकार | "सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" (सहस्रबाहु के समान भयंकर शत्रु मानना) |
| रूपक अलंकार | "भृगुकुलकेतू" (भृगुवंश रूपी ध्वजा) |
यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है... कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं, जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए।
| अवधी शब्द | खड़ी बोली का शब्द |
|---|---|
| कोही | क्रोधी |
| बेषु | वेष / वेशभूषा |
| लरिकाई | लड़कपन / बचपन में |
| रिस | क्रोध / गुस्सा |
| आयसु | आज्ञा / आदेश |
नीचे कोष्ठक में कविता से कुछ शब्द चुनकर दिए गए हैं। उन शब्दों से संबंधित लोकोक्ति और उनका अर्थ लिखकर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए। (शब्द: राम, राजा, बात, सिरु)
| शब्द | लोकोक्ति | अर्थ एवं वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| मन | मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। | अर्थ: आत्मविश्वास से सफलता मिलती है। वाक्य: परीक्षा कठिन है पर मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। |
| राम | राम भरोसे हिंदू होटल। | अर्थ: कार्य भगवान के भरोसे छोड़ देना। वाक्य: उस दुकान का तो राम भरोसे हिंदू होटल वाला हाल है। |
| राजा | कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली। | अर्थ: दो असमान स्तर के व्यक्तियों की तुलना। वाक्य: उस सेठ और इस मजदूर की तुलना कैसी, कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली। |
| बात | बात का बतंगड़ बनाना। | अर्थ: छोटी सी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा देना। वाक्य: कुछ लोगों को छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने की आदत होती है। |
| सिरु (सिर) | सिर मुँडाते ही ओले पड़ना। | अर्थ: कार्य आरंभ करते ही बाधा उत्पन्न होना। वाक्य: नई दुकान खोली और लॉकडाउन लग गया, इसे कहते हैं सिर मुँडाते ही ओले पड़ना। |
नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए-
"अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।"
गद्य-रूप:
अत्यधिक डर के कारण राजा जनक कोई उत्तर नहीं दे रहे हैं। (यह देखकर) कुटिल स्वभाव वाले राजा अपने मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहे हैं। देवता, मुनि, नाग और नगर के सभी स्त्री-पुरुषों के हृदय में बड़ा भारी भय समा गया है और वे सभी गहरी चिंता में डूब गए हैं।
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