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परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।
मौन संवाद:
माता सुनयना (आँखों ही आँखों में चिंता से): "पुत्री सीते, न जाने विधाता ने हमारे भाग्य में क्या लिख रखा है! अभी तो तुम्हारी खुशी का क्षण आया था, और अब मुनि परशुराम के इस भयंकर क्रोध को देखकर मेरा हृदय काँप रहा है।"
सीता (झुकी हुई पलकों और डबडबाई आँखों से): "माता, मेरा आधा पल भी एक युग के समान बीत रहा है। यद्यपि श्रीराम का शांत और धैर्यवान मुखमंडल मुझे कुछ ढाँढस बँधा रहा है, परंतु मुनिराज का फरसा और क्रोध मेरे मन में अमंगल की भारी आशंका उत्पन्न कर रहा है। हे शिव, सब कुशल करना।"
सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।
सीता का दृष्टिकोण:
कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।
मेरा परिचय (एक छात्र के रूप में):
मेरा नाम [अपना नाम लिखें] है। मैं अहंकार और दिखावे के बजाय अपनी मेहनत, ईमानदारी और सरलता से पहचाना जाना पसंद करता हूँ। मैं किसी भी चुनौती या कठिन परिस्थिति का सामना धैर्य और शांति से करने का प्रयास करता हूँ। मुझे दूसरों की सहायता करना और नई चीजें सीखना बहुत पसंद है। मेरा मानना है कि मनुष्य की असली श्रेष्ठता उसके विनम्र व्यवहार और सकारात्मक विचारों में ही निहित होती है।
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